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तीन बच्चों का शव पहुंचते ही कोहराम मचा 

Tue, 25 Apr 2017 12:20 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, मुजफ्फरनगर
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आग में तीन बच्चों की मौत होने से गगमीन शिकारपुर के परिजन। - फोटो : amar ujala
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मुजफ्फरनगर के भौराकलां थाना क्षेत्र के गांव शिकारपुर में तीन बच्चों के शव गांव में पहुंचते ही कोहराम मच गया। शाम को गमगीन माहौल में तीनों बच्चों के शवों को दफनाया गया।    
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शिकारपुर निवासी शानू करीब एक माह पूर्व ही हरियाणा के जींद शहर में बाग में मजदूरी करने गया था।  वहां पर ही उसका साला निसार पहले से ही मजदूरी कर रहा था। शानू बाग में झोपड़ी डाल कर रह रहा था। शनिवार रात करीब 12 बजे अचानक झोपड़ी में आग लग गई। झोपड़ी में शानू अपनी पत्नी शकीरा और 5 बच्चों के साथ सो रहा था। झोपड़ी में ही शानू के साले निसार की पुत्री फाकरीन (11) भी  सो रही थी। झोपड़ी में आग लगने पर शानू और पत्नी शकीरा की आंख खुली तो दोनों ने बच्चों को बाहर निकालने के प्रयास शुरू कर दिए। दो वर्षीय जोया,  11 वर्षीय फाकरीन को तो झोपड़ी से बाहर निकालने के सफल हो गए, परंतु जब तक आफसा  (6) जीशान(4) और चार माह की जिया को बार निकाल पाते, तब तक जलती झोपड़ी बच्चों के ऊपर गिर गई। जिससे तीनों बच्चों की जलने से मौके पर मौत हो गई। आग से बच्चों को बचाने के प्रयास में शकीरा भी झुलस गई। ग्रामीणों ने गंभीर हालत में शकीरा, फाकरीन और जोया को अस्पताल में भर्ती कराया था। सोमवार शाम गांव में तीनों बच्चों आफसा,  जिशान और जोया  के शव पहुंचते ही परिजनों में कोहराम मच गया।            

ग्रामीण भी हैं शोकाकुल            
तीन बच्चों की मौत से रिश्तेदारों और परिजनों का रो रोकर बुरा हाल है। ग्रामीण शवों का इंतजार सुबह से कर रहे थे। शाम को गमगीन माहौल में बच्चों के शव गांव के कब्रिस्तान में सुपुर्द ए खाक किए गए। बच्चों के जनाजे में भारी संख्या में ग्रामीण शामिल हुए। इस दौरान हरेक ग्रामीण  की आंखें नम थी।            
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गांव में पहली बार उठे तीन जनाजे             
गांव शिकारपुर के शानू के परिवार पर गमों का पहाड़ टूट पडा है। शानू के तीन बच्चे एक साथ जिंदा  काल के ग्रास में पहुंच गए। ग्राम प्रधान के पति अब्बास अहमद व समाजसेवी मास्टर गुल मोहम्मद का कहना है गांव में ऐसी दुखद घटना पहली बार घटी है। पहली बार गांव में एक साथ तीन जनाजे उठे हैं। हादसे से पूरा गांव गमगीन है।            

बच्चों की खातिर ही जींद गया था परिवार            
शानू का परिवार बेहद गरीब है। गांव शिकारपुर में मजदूरी करने से उसकी गुजर बसर नहीं हो पा रही थी।  बच्चों का अच्छी तरह से लालन पालन के उद्देश्य से वह पत्नी  और बच्चों के साथ लेकर साले निसार के बुलावे पर जींद गया था, परंतु उसे क्या पता था कि जिन को खुशी के लिए  वह गांव छोड़ रहा है,  एक दिन वे भी उसके पास नहीं रहेंगे। ग्रामीणों ने की प्रशासन और शासन से पीड़ित परिवार की आर्थिक सहायता की मांग की है।        
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