शीशों के बीच सजी मिठाइयां और बक्खर में लथपथ हरे-पीले, लाल रसगुल्लों को खाने से पहले सेहत के बारे में ख्याल कर लें। शहर और देहात क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर खाद्य वस्तुओं में मिलावट का गोरखधंधा सामने आया है। बतीसा और रंगीन रसगुल्लों में हानिकारक केमिकल युक्त रंग पाए गए हैं, जबकि नमकीन में चावल का आटा मिला है। दीपावली पर लिए नमूनों के आधार पर 32 लोगों के खिलाफ एडीएम प्रशासन की कोर्ट में केस दायर किए गए हैं।
दीपावली पर खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम ने शहर और देहात क्षेत्रों में मिठाइयों, नमकीन भंडार और दूध की डेयरियों पर ताबड़तोड़ छापामारी की थी। टीम ने कार्रवाई करते हुए करीब 75 नमूने लिए। जिन्हें जांच-पड़ताल के लिए लखनऊ लैबोरेट्री भिजवाया गया। जांच में जो तथ्य सामने आए हैं, वह चौंकाने वाले हैं। मिठाइयों को स्वादिष्ट बनाने के लिए विक्रेताओं ने जनता की सेहत से खिलवाड़ करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। मिलावटी सामान तैयार कर पैकिंग पर लेबल लगाया गया। 75 नमूनों में से लैबोरेट्री ने 32 को फेल पाया है। इनमें 11 दूध, 9 मावा के अलावा बाकी नमकीन, पनीर और अन्य खाद्य वस्तुए हैं।
नमकीन में बेसन की जगह चावल का आटा और रंग का प्रयोग मिला है, जबकि दूध और मावे में मानक के विपरीत फेट कम निकला है। इसको आधार बनाते हुए 32 लोगों के खिलाफ एडीएम प्रशासन की कोर्ट में खाद्य सुरक्षा अधिनियम वर्ष 2006 के तहत धारा 58, 59(1), 51 और 52 के तहत मुकदमा पंजीकृत किया गया है। इनके विरुद्ध मिलावट का खेल करने, हानिकारक रंगों का प्रयोग करने आदि में केस चलेगा। मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी राहुल सिंह कुशवाहा ने बताया कि दीपावली पर हुई सैंपलिंग में 32 लोगों पर केस दर्ज किया गया है। शहर में मिठाई और नमकीन दोनों में ही मिलावट मिली है। नमकीन में बेसन की जगह चावल का आटा, प्रतिबंध मसालों का प्रयोग और अधिकांश मिठाई को घी में बताकर रिफाइंड ऑयल में बनाया गया है।
73 सैंपल भरे, 24 फेल, 22 अधोमानक
खाद्य सुरक्षा की टीम ने एक जनवरी से 15 मार्च तक विभिन्न स्थानों पर छापेमारी कर 73 नमूने भरे हैं, जिन्हें जांच के लिए लखनऊ भेजा गया। इनमें से 24 की रिपोर्ट विभाग को मिल गई है। इनमें 22 खाद्य वस्तुएं अधोमानक निकले हैं। साथ ही दो नमूने खाद्य रूप में असुरक्षित मिले हैं। इनमें बतीसा मिठाई और रंगीन रसगुल्ला शामिल हैं। दोनों में ही हानिकारक रंग की मिलावट मिली है। विभाग इनके खिलाफ नोटिस जारी करेगा। फेल नमूनों के आधार पर इनके खिलाफ भी मुकदमा दर्ज करने की कार्रवाई की तैयारी है।
दूध में पानी, मावा में वनस्पति घी
दीवाली और होली पर दूध, मावा की सैंपलिंग अधिक की गई है। प्राथमिक रिपोर्ट में ही दूध और मावा में फैट 30 प्रतिशत से भी कम निकला है। दूध में मिल्क पाउडर की मिलावट मिली है, जबकि मावा में वनस्पति घी के साथ ही दूध की क्रीम निकालने के बाद तैयार पाया गया है। इन दोनों खाद्य वस्तुओं से बनी मिठाइयां और अन्य खाने-पीने की चीजों को सेहत के लिए विभाग ने नुकसानदायक माना है।