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पालिका की चेकबुक और 20 फाइलें कब्जे में ली    

Tue, 25 Apr 2017 12:20 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, मुजफ्फरनगर
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विकास से संबंधित फाइलों की जांच-पड़ताल करते एसडीएम। - फोटो : amar ujala
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मुजफ्फरनगर के खतौली में निर्माण कार्य कराने के बाद ठेकेदार का भुगतान नहीं करने और कमीशन मांगने की शिकायत मिलने पर डीएम के आदेश पर एसडीएम ने नगरपालिका पहुंचकर नौ चेकबुक रजिस्टर, 10 चेकबुक समेत 20 विकास से संबंधित फाइलें अपने कब्जे में ले ली। एसडीएम ने शिकायतकर्ता ठेकेदार के बयान भी दर्ज किए हैं।                
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इंडियन कंस्ट्रक्शन कंपनी के मालिक एवं ठेकेदार असगर ने 22 अप्रैल को डीएम दिनेश कुमार सिंह को दिए गए शिकायती पत्र में बताया कि उसने पालिका में 1.60 करोड़ के विकास कार्यों का टेंडर लिया था। उसने एक करोड़ रुपये का कार्य कर भी दिया। चेयरमैन पारस जैन ने 15 लाख रुपये का भुगतान चेक देकर कर दिया था। आरोप है कि बाकी भुगतान करने के लिए चेयरमैन सुविधा शुल्क मांग रहे हैं। आरोप है कि चेयरमैन ने 15-15 लाख रुपये के दो चेक काट दिए थे। कमीशन नहीं देने पर उन चेकों को निरस्त कर दिया गया।   डीएम ने शिकायत को गंभीरता से लेते हुए एसडीएम शीतल प्रसाद गुप्ता को जांच कर कार्रवाई करने के आदेश जारी किए। सोमवार को एसडीएम पालिका पहुंचे। एसडीएम ने ईओ अनूप राय और जेई से विकास संबंधी फाइलें एवं चेकबुक मांगी। एसडीएम ने जांच-पड़ताल करने के लिए नौ चेकबुक रजिस्टर, 10 चेकबुक और 20 विकास संबंधी फाइलें अपने कब्जे ले ली। बाद में एसडीएम ने शिकायतकर्ता ठेकेदार के बयान भी दर्ज किए।                
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-चेकबुक और विकास कार्यों से संबंधित फाइल कब्जे में ले ली गई हैं। पूरे मामले की जांच-पड़ताल की जाएगी। जांच में दोषी पाए जाने पर चेयरमैन और संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी।  - शीतल प्रसाद गुप्ता, एसडीएम।                  

 कम होने का नाम नहीं ले रही मुसीबतें       
खतौली। पालिका चेयरमैन पारस जैन की मुसीबतें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। भाजपा नेता राजा वाल्मीकि हत्याकांड में साजिश रचने के मामले में नामजद कराए गए चेयरमैन का अभी पीछा भी नहीं छूट सका था कि ठेकेदार ने शिकायत कर उनके सामने दूसरी मुसीबत खड़ी कर दी है।       

राजा हत्याकांड में पुलिस ने आरोपी चेयरमैन को गिरफ्तार अभी नहीं किया है। पुलिस कहती है कि हत्याकांड का खुलासा करने को चेयरमैन से लगातार पूछताछ चल रही है। विरोधी सभासदों की शिकायत पर पूर्व की सपा सरकार में चेयरमैन के वित्तीय अधिकार सीज कर दिए गए थे, लेकिन बाद में चेयरमैन के वित्तीय अधिकार बहाल कर दिए गए। इसके बावजूद विरोधी सभासद खेमा चुप नहीं बैठा था। करोड़ों के घोटालों की शिकायत की जांच-पड़ताल अभी चल रही है। चेयरमैन पद ग्रहण करने के बाद से ही पारस जैन विवादों में घिरे रहे हैं। चेयरमैन पद का कार्यकाल अब समाप्त होने के नजदीक है, इसके बावजूद चेयरमैन की मुसीबतें कम नहीं हो रही हैं।        
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