फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

बापू के विवादित मसले सुलझाते थे ‘कातिल’

Sat, 26 Sep 2015 12:19 AM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, मुजफ्फरनगर
विज्ञापन
विज्ञापन
मुजफ्फरनगर। बंगलूरू में अहमदाबाद पुलिस के हत्थे चढ़े सेजल उर्फ ज्योति और वासु की शहर के अखिल गुप्ता और वर्षा से जान-पहचान थी। आसाराम के सूरत आश्रम से जुड़े वासु और ज्योति सत्संग में कई-कई दिनों तक अहमदाबाद आश्रम में रहते थे, उन्हें यह भी पता था कि अखिल गुप्ता बापू का खास रसोइया है।
विज्ञापन


गुजरात पुलिस की पूछताछ में कई अहम जानकारियां सामने आई हैं। क्राइम ब्रांच के मुताबिक सूरत आश्रम में संदिग्ध गतिविधियों में संलिप्त साधकों का क्राइम रिकार्ड खंगाला जा रहा है। आश्रम में ऐसे चेलों की कमी नहीं थी जो प्रॉपर्टी और दूसरे विवादों के पचड़े सुलझाते थे।

पुलिस की सख्ती के बाद ऐसे तत्व बड़ी तादाद में सूरत छोड़ चुके हैं। एक साधक से पूछताछ के बाद पुलिस ज्योति और वासु का पता लगाते हुए बंगलूरू तक पहुंच गई। पुलिस को यह मालूम हो गया था कि अखिल गुप्ता की हत्या के बाद ज्योति और वासु ने सूरत छोड़ दिया है।
विज्ञापन


पूरे गिरोह को यह दोनों ही संचालित करते थे। अखिल के हत्यारे संजय उर्फ अंकित और कार्तिक ने अखिल की हत्या के बाद फोन पर वासु को टारगेट पूरा करने की जानकारी दे दी थी, लेकिन हत्यारों ने जब पैसों की डिमांड की तो वासु ने बात टाल दी। बापू की साधक ज्योति इंजीनियर है।

सूरत के सत्संग में ही उसकी बीजापुर कर्नाटक के वासु से नजदीकियां बढ़ीं। अध्यात्म के बीच दोनों ने प्रेम विवाह कर लिया। कुछ ऐसा ही शहर के अखिल गुप्ता के मामले में हुआ था। छत्तीसगढ़ के रायपुर की वर्षा अपने परिवार के साथ बापू के आश्रम में आती थी।

यहीं पर अखिल से उनका मेलजोल बढ़ा और वर्ष 2008 में दोनों ने बापू से आशीर्वाद लेकर शादी कर ली। अखिल और वर्षा के दो बच्चे भी हैं। अहमदाबाद आश्रम को छोड़कर बीते सात साल से अखिल यहां अपना डेयरी का कारोबार करने लगा था। अचानक जिंदगी में खतरनाक मोड़ आया।

सूरत की बहनों ने दुष्कर्म का मुकदमा दर्ज कराते हुए अहमदाबाद आश्रम में रसोइये अखिल की मौजूदगी बता दी थी। गुजरात पुलिस अखिल और वर्षा को अहमदाबाद ले गई और बाद में अखिल सरकारी गवाह बन गया। अखिल का यही फैसला उसकी हत्या की वजह बन गया। क्राइम ब्रांच के मुताबिक अभी तक की जांच में पाया गया है कि बापू के आश्रम में गैरकानूनी कामों में लिप्त तत्वों का जमावड़ा रहता था।

बापू का ‘अंधभक्त’ था गुप्ता परिवार
मुजफ्फरनगर। अखिल गुप्ता संत आसाराम के आश्रम में 11 साल तक रहा। शहर के अबूपुरा निवासी नरेश गुप्ता बापू के अनुयाई थे। पिता की रुचि के चलते अखिल भी वर्ष 1997 में बापू का अनन्य भक्त हो गया। उसकी सेवा से प्रभावित होकर आसाराम ने उसे अहमदाबाद आश्रम में अपना रसोइया बना लिया।

कुछ ही दिनों में वह बापू का खासमखास हो गया। बुजुर्ग नरेश गुप्ता ने सपने में भी नहीं सोचा था कि जीवन को धार्मिक और आध्यात्म की राह पर ले जाते हुए इकलौते बेटे की बेरहम मौत का दर्द बुढ़ापे में झेलना होगा। फिलहाल पुलिस सुरक्षा में उनका परिवार रह रहा है। गुजरात पुलिस के खुलासे पर अभी भी गुप्ता को विश्वास नहीं हो रहा है। वह कहते हैं कि गुनहगार सामने आएं तभी सच्चाई पर विश्वास होगा।

वासु और ज्योति से पूछताछ की तैयारी
मुजफ्फरनगर। बंगलूरू से पकड़े गए दंपति वासु और ज्योति से पूछताछ के लिए मुजफ्फरनगर पुलिस उन्हें ट्रांजिट रिमांड पर लेने की तैयारी कर रही है। क्राइम ब्रांच के सब इंस्पेक्टर सीबी चौधरी ने बताया कि अखिल गुप्ता हत्याकांड में मुजफ्फरनगर पुलिस ने संपर्क किया है। फिलहाल संजय और कार्तिक की तलाश हो रही है। वारदात के लिए पैसे का इंतजाम करने वाली टीम के सदस्यों पुनीत, सुनील और शैलेंद्र को भी पकड़ने के लिए दबिश दी गई है।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें