पीड़ितों के साथ नाइंसाफी नहीं होगी
पुरकाजी। दलित युवती के साथ हुई गैंगरेप और हत्या की घटना में पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए गए आरोपियों को रिहा कर देने से दलित समाज के लोगों में पुलिस के प्रति रोष व्याप्त है। दलितों ने एक मीटिंग कर एसएसपी से मिलने का निर्णय लिया है। उधर, पुलिस सबूतों के अभाव में आरोपियों को रिहा करने की बात कहकर दलितों को संतुष्ट करने का प्रयास कर रही है। सीओ सदर रिजवान अहमद का कहना है कि घटना की जांच चल रही है। जांच में दोष सिद्ध होने पर उन्हें गिरफ्तार कर जेल भेजा जाएगा। सीओ का कहना है कि पुलिस की पूरी हमदर्दी पीड़ित पक्ष के साथ है और उसकी हरसंभव मदद की जाएगी।
कस्बे के निकटवर्ती गांव में 9 मई को दलित युवती के साथ हुई घटना में परिजनों द्वारा पुलिस से मुकदमा दर्ज कर आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग करते हुए शव का दाह संस्कार करने से इंकार कर दिया था। इस मामले में देर रात मुकदमा दर्ज होने और मां-बेटी सहित तीन आरोपियों को हिरासत में लेने के बाद ही शव का दाह संस्कार किया गया था। पुलिस हिरासत में लिए गए आरोपियों से लगातार घटना को लेकर पूछताछ में लगी हुई थी। मगर, घटना को लेकर कोई सबूत नहीं मिलने और पोस्टमार्टम रिपोर्ट में रेप की पुष्टि नहीं होने से पुलिस ने हिरासत में लिए गए तीनों आरोपियों को शनिवार देर रात रिहा कर दिया था, जिसे लेकर दलित समाज के लोगों में पुलिस के प्रति रोष व्याप्त है। ग्राम भूराहेडी में हुई बैठक में एसएसपी से मिलकर घटना से अवगत कराकर अपना पक्ष रखने का निर्णय लिया गया है। इस संबंध में घटना की जांच कर रहे सीओ सदर रिजवान अहमद का कहना है कि ना तो पोस्टमार्टम रिपोर्ट में ही रेप की पुष्टि हुई है और ना ही जांच और पूछताछ में ऐसा कोई सबूत हाथ लगा है, जिससे मुकदमे में नामजद लोगों को आरोपी बनाया जा सके। हिरासत में लिए गए लोगों को कुछ जिम्मेदार लोगों की सुपुर्दगी में दिया गया है। घटना की जांच चल रही है। जांच में दोष सिद्ध होने पर उन्हें गिरफ्तार कर जेल भेजा जाएगा। सीओ का कहना है कि पुलिस की पूरी हमदर्दी पीड़ित पक्ष के साथ है और उसकी हरसंभव मदद की जाएगी।