मुजफ्फरनगर। दो माह में बेटी और दरोगा पिता की हत्या से शाहपुर के कसेरवा गांव में हर कोई सन्न है। शाहजहांपुर पुलिस कंट्रोल रुम में तैनात उप निरीक्षक कसेरवा के मेहरबान खां की लाश रविवार को वहां मिली है। गत सात अप्रैल को शाहजहांपुर में ही भरे बाजार उनकी बेटी सना की सिरफिरे आशिक ने गोली मार कर हत्या कर दी थी। परिजन घटना के बाद से गमजदा है। पैतृक गांव में आज दारोगा को सुपुर्दे खाक किया जाएगा।
बुढ़ाना तहसील के शाहपुर थाना क्षेत्र के गांव कसेरवा निवासी भौंदे खां उर्फ मेहरबान (59) शाहजहांपुर पुलिस लाइन में वायरलेस विभाग में उप निरीक्षक के पद पर तैनात थे। वे लंबे समय से वहां के मोहल्ला ऐमनजेई जलालनगर में परिवार समेत रह रहे थे। शनिवार दोपहर खाना खाने के बाद वह ड्यूटी पर चले गए। रात में घर नहीं लौटने पर परिजनों को चिंता हुई और उनकी तलाश की गई, मगर उनका कोई अता-पता नहीं चल सका। रविवार को घर के पास ही नाले में उनकी लाश मिली। परिजनों ने उनकी हत्या का आरोप लगाया है। दरोगा की मौत की खबर कसेरवा गांव में पहुंचते ही नाते रिश्तेदार गमजदा हो गए, क्योंकि दो माह पहले ही उनकी बेटी सना की शाहजहांपुर के बाजार में कोचिंग से लौटते हुए दिनदहाडे़ सिरफिरे आशिक अरशद ने गोली मार कर हत्या कर दी थी। सना और अरशद कोचिंग में एक साथ पढ़ते थे तथा पुलिस भर्ती की तैयारी कर रहे थे। अरशद की हरकतों की वजह से सना से उससे बातचीत बंद कर दी थी।
हत्यारोपी अरशद और उसका दोस्त फिलहाल जेल में है। सना की हत्या के बाद उसके शव को बागपत जिले के गांव असारा में ननिहाल में दफनाया गया था। दो माह में बेटी के बाद पिता की हत्या से कसेरवा गांव में घरों पर सन्नाटा पसरा है। वारदात की सूचना के बाद परिजन और रिश्तेदार शाहजहांपुर रवाना हो गए। दरोगा के चचेरे भाई तौसीफ ने बताया कि मृतक मेहरबान खां चार भाईयों में सबसे बड़े थे। उनसे छोटे भाई नूरदीन यूपी पुलिस में सिपाही के पद पर सहारनपुर में, कल्लू गागलहेड़ी में तथा मंजूर हसन सहारनपुर में दुकान करते है। तौसीफ के मुताबिक मृतक दरोगा को सोमवार को पैतृक गांव कसेरवा में दफनाया जाएगा।
उच्च शिक्षित थे दरोगा, बेच दी थी पैतृक भूमि
शाहपुर। 1980 में पुलिस में भर्ती हुए मेहरबान खां पुत्र जबरदीन उच्च शिक्षित थे। उनकी अंग्रेजी विषय में महारथ थी। बागपत के गांव असारा की जाहिदा से निकाह के बाद परिवार में चार बेटी और एक बेटा पैदा हुए। एमए की छात्रा बेटी सना दरोगा बनना चाहती थी। परिजनों के अनुसार पांच वर्ष पहले उन्होंने कसेरवा की पैतृक भूमि बेच दी थी और शाहजहांपुर में रहने लगे थे।