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बसपा जिलाध्यक्ष कमल गौतम को एक मामले में मिली जमानत

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बसपा जिलाध्यक्ष को एक मामले में मिली जमानत
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मुजफ्फरनगर। दलित आंदोलन के दौरान शहर में हुई हिंसा में जेल भेजे गए बसपा जिलाध्यक्ष कमल गौतम को शहर कोतवाली में दर्ज एक मुकदमे में कोर्ट से जमानत मिल गई है। अभी नई मंडी कोतवाली और सिविल लाइन थाने में दर्ज मुकदमों में जमानत नहीं मिली है। इसलिए बसपा जिलाध्यक्ष की अभी जेल से रिहाई संभव नहीं है।
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दो अप्रैल को शहर में दलितों के आंदोलन के दौरान जमकर हिंसा हुई थी, जिसमें उपद्रवियों ने तोड़फोड़, आगजनी की थी। कई वाहनों में आग लगाई थी। नई मंडी कोतवाली पर पथराव कर कोतवाली परिसर और बाहर खडे़ डेढ़ दर्जन वाहनों को फूंक दिया था। इस संबंध में नई मंडी कोतवाली के अलावा सिविल लाइन और सिटी कोतवाली में अब तक 42 मुकदमे दर्ज हो चुके है। जीआरपी और आरपीएफ में भी मामले दर्ज है, जिनमें 91 आरोपियों को जेल भेजा जा चुका है। पुलिस ने हिंसा के मामले में बसपा जिलाध्यक्ष कमल गौतम को 6 अप्रैल को गिरफ्तार कर जेल भेजा था। बसपा जिलाध्यक्ष के खिलाफ शहर के तीनों थानों की पुलिस ने कार्रवाई की है। गत सप्ताह सिविल लाइन थाने में दर्ज उपद्रव के मामले में कोर्ट ने बसपा जिलाध्यक्ष की जमानत अर्जी खारिज कर दी थी। गत सोमवार को एसीजेएम प्रथम कोर्ट में नई मंडी कोतवाली में दर्ज हिंसा, उपद्रव के मामले में उनके अधिवक्ता की ओर से दाखिल जमानत अर्जी को भी रद्द कर दिया था। शहर कोतवाली इलाके की हिंसा के मामले में बृहस्पतिवार को बसपा जिलाध्यक्ष कमल गौतम को कोर्ट से जमानत मिल गई है। सीजेएम संगीता कुमारी ने अर्जी पर सुनवाई करते हुए 20-20 हजार की दो जमानत दाखिल करने के आदेश दिए है। आरोपी के विरुद्ध तीनों थानों में मामले दर्ज हुए है। शहर कोतवाली में दर्ज मामले में जमानत अर्जी मंजूर की गई है। अभी नई मंडी कोतवाली और सिविल लाइन थाने में दर्ज मुकदमों में भी अमानत मिलनी है, तभी बसपाध्यक्ष की जेल से रिहाई संभव हो सकेगी।
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