संपत्ति के लालच में युवक की गई थी हत्या
मुजफ्फरनगर। चरथावल क्षेत्र के गांव रोनीहरजीपुर में 20 फरवरी की रात हुई युवक की हत्या का पुलिस ने उसके भाई-भतीजे को गिरफ्तार कर खुलासा कर दिया है। आरोपियों ने युवक की संपत्ति हड़पने के लिए उसकी गोलियां मारकर हत्या कर दी थी, जिसे आत्महत्या बताकर शव का अंतिम संस्कार करने का भी प्रयास किया गया था। हालांकि ऐनवक्त पर पहुंची पुलिस ने लाश को कब्जे में लेकर इसे हत्या में दर्ज कर शव का पोस्टमार्टम कराया था।
पुलिस लाइन स्थित सभागार में प्रेसवार्ता करते हुए एसएसपी सुधीर कुमार सिंह ने बताया कि चरथावल थाना क्षेत्र के गांव रोनी हरजीपुर में 20 फरवरी की देर रात घर में सोए मोनू उर्फ वीर प्रताप उर्फ मनोज पुत्र ऋषिपाल की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। परिजनों ने मामले को आत्महत्या बताते हुए बिना पुलिस कार्रवाई के शव का अंतिम संस्कार करने का प्रयास किया था, लेकिन सूचना पर पहुंची पुलिस ने शव की हालत देख मामला हत्या का बताते हुए शव को कब्जे में लेकर मोर्चरी भेज दिया था। इस पर मामले में मोनू के भाई अजित कुमार ने अज्ञात के खिलाफ हत्या की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। एसएसपी ने बताया कि जांच में पता चला कि मोनू व उसके भाई अजित का पुश्तैनी छह बीघा जमीन को लेकर विवाद था। वहीं, अजित के मोनू पर छह लाख रुपये भी निकल रहे थे। मोनू उक्त जमीन को बेचकर अजित को छह लाख रुपये देना चाहता था। हालांकि अजित उस जमीन को बेचने नहीं देना चाहता था। इसी के चलते अजित ने अपने बेटे सूरज के साथ मिलकर मोनू की हत्या की साजिश रची। 20 फरवरी की रात मकान में सोए मोनू की दोनों ने अलग-अलग तमंचों से सिर में गोलियां मारकर हत्या कर दी थी। बाद में इसे आत्महत्या बताते हुए शव का अंतिम संस्कार करने का भी प्रयास किया गया था। इंस्पेक्टर चरथावल राजीव कुमार ने बताया कि भाई व भतीजे द्वारा ही युवक की हत्या किए जाने की बात सामने आने के बाद पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर उनकी निशानदेही पर अजित के खेत में छिपाकर रखे गए हत्या में प्रयुक्त दोनों तमंचों के साथ ही मोनू का मोबाइल भी बरामद कर लिया गया है। दोनों आरोपियों को जेल भेज दिया गया है।
मृतक की पत्नी हो सकती है संपत्ति की वारिस
मुजफ्फरनगर। चरथावल क्षेत्र के गांव रोनीहरजीपुर में जमीन के लिए अपने ही भाई मोनू की हत्या करने वाले अजित व उसके बेटे सूरज को भाई की हत्या करने के बावजूद उसकी संपत्ति से वंचित होना पड़ेगा। दरअसल, मोनू का अपनी पत्नी से तलाक का मुकदमा कोर्ट में विचाराधीन है, जिसमें दोनों पक्षों की सुनवाई पूरी हो चुकी है और अब केवल कोर्ट को तलाक पर मुहर लगनी ही बाकी रह गई है। एसएसपी के अनुसार इसके लिए कोर्ट ने 21 फरवरी की तिथि निर्धारित की थी, जिसके बाद पति-पत्नी की राहें पूरी तरह से अलग हो जानी थी। वहीं, अजित को कोर्ट से तलाक की तारीख 20 फरवरी मालूम थी, जिसके चलते उसने हत्या के लिए 20 तारीख की रात को चुना, क्योंकि मोनू की हत्या के बाद उसका कोई वारिस नहीं होने से उसकी संपत्ति अजित को ही जानी थी। इसके चलते अजित ने बेटे सूरज के साथ मिलकर 20 फरवरी की रात ही भाई मोनू की हत्या कर दी, जबकि उसका पत्नी से विधिवत तलाक 21 फरवरी को होना था। ऐसे में 20 फरवरी को ही मोनू की हत्या कर दी गई, तो 21 फरवरी को उसका पत्नी से तलाक भी नहीं हो सका, जिसके चलते अब मोनू की संपत्ति की वास्तविक हकदार उसकी पत्नी ही होगी और अजित को भाई की हत्या की सजा उसकी संपत्ति खोकर चुकानी होगी।