देवर-भाभी को उम्रकैद
मुजफ्फरनगर। अदालत ने चितौड़ा के धर्मवीर हत्याकांड में दोषी पाए गए देवर-भाभी को आजीवन कारावास और तीस हजार रुपये जुर्माना की सजा सुनाई है। सजा सुनाने के बाद दोनों को जेल भेज दिया गया। चार साल पहले धर्मवीर की घर से बुलाकर हत्या कर दी गई थी।
गांव चितौडा निवासी चमन सिंह ने 29 मई 2013 को जानसठ कोतवाली पर तहरीर दी थी। तहरीर में बताया था कि उसका भतीजा धर्मवीर पुत्र बदलू दोपहर को अचानक कही चला गया है, जो लौट कर नहीं आया। पुलिस ने तहरीर पर गुमशुदगी दर्ज की थी। पांच दिन बाद दो जून को धर्मवीर की लाश गांव में गुलाम अली के खेत में पड़ी मिली थी। पुलिस ने हत्या का मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की। मोबाइल की कॉल डिटेल के आधार पर अजीत पुत्र चमन को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया। उसने पूछताछ में बताया कि उसके परिवार की भाभी सुमित्रा के साथ अनैतिक संबंध है। धर्मवीर ने उनको आपत्तिजनक स्थिति में देख लिया था। भेद खुलने के डर से उसने धर्मवीर को फोन कर जंगल में बुलाया और सिर में पत्थर मार कर हत्या कर दी। पुलिस ने अजीत और सुमित्रा के खिलाफ आरोप पत्र अदालत में दाखिल किया। इस मुकदमे की सुनवाई एडीजे दिनेश चंद्र सिंह की अदालत संख्या (एक) में हुई। सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता जितेंद्र कुमार त्यागी और प्रशांत बालियान ने कोर्ट में छह गवाह और सबूत पेश किए। न्यायाधीश ने दोनों पक्षों को सुनते हुए अभियुक्त अजीत और सुमित्रा को हत्या कर लाश छुपाने का दोषी करार देते हुए धारा 302 के तहत आजीवन कारावास और दस-दस हजार रुपये जुर्माना लगाया। साथ ही धारा 201 के तहत तीन वर्ष का कारावास और पांच-पांच हजार रुपये जुर्माना की सजा सुनाई है।