मास्टर राजबीर की हत्या के बाद सक्रिय हुआ था पुलिस प्रशासन
मुजफ्फरनगर। भौराखुर्द की रंजिश में दर्जनों लोगों की हत्या होने के बाद पुलिस-प्रशासन वर्ष 2010 में तब सक्रिय हुआ, जब गांव गढ़ी नौआबाद के एक स्कूल में मास्टर राजबीर सिंह की गोलियों से भूनकर हत्या की गई। हत्यारे इतने दुस्साहसी थे कि वे पैदल ही स्कूल में पहुंचे थे और कक्षा में बच्चों को पढ़ाते समय छात्र-छात्राओं के सामने ही मास्टर राजबीर सिंह की गोलियों से भूनकर हत्या कर दी। हत्या करने के बाद भी हत्यारे भागे नहीं, बल्कि इत्मीनान से उनके शव की तलाशी ली और पेंट की जेब से उनकी बाइक की चाबी निकालकर उसी पर फरार हो गए। मास्टर राजबीर सिंह की इस हत्या के बाद पुलिस-प्रशासन का ध्यान गांव की तरफ गया, जिसके बाद वहां कानून व्यवस्था पर ध्यान दिया गया। नतीजतन वर्ष 2010 के बाद से अब तक गांव में कोई बड़ी वारदात नहीं हुई, जिससे ग्रामीण भी अब राहत की सांस लेते हैं। वहीं, वर्ष 2014 में आदेश पक्ष के सुखबीर की हत्या में शोभाराम पक्ष के सतेंद्र, जितेंद्र व श्यामा को उम्रकैद होने और इसके बाद वर्ष 2016 में शोभाराम के बेटे सुखपाल की हत्या में आदेश के पिता ब्रह्मपाल समेत आठ लोगों को सजा होने के बाद भी गांव के हालात बदले और फिलहाल गांव में पूरी तरह से शांति बनी हुई है।
मर जाण दे, सिलनो-सिलनो भेज दूंगो
मुजफ्फरनगर। भौराखुर्द गांव में वर्ष 2004 से शोभाराम व आदेश पक्ष के बीच शुरू हुई खूनी रंजिश के बाद गांव में होने वाले खून-खराबे इतने आम थे कि थानेदार हत्या की सूचना मिलने पर कहते नजर आते थे कि मर जाण दे, सिलनो-सिलनो भेज दूंगो। वहीं, खौफ भी ऐसा था कि थानेदार दोनों पक्षों की खूनी अदावतों के चलते थाने से रात-बेरात निकलने में भी कतराते थे।
गांव में कड़ी सुरक्षा के बीच हुआ अंतिम संस्कार
मुजफ्फरनगर। गांव भौराखुर्द निवासी आदेश बालियान की एनकाउंटर में मौत के बाद जटमुझेड़ा स्थित मोर्चरी पर उसके शव का पोस्टमार्टम किया गया। पोस्टमार्टम के बाद मोर्चरी पहुंचे परिजन शव लेकर भौराखुर्द पहुंचे, जहां शाम के समय शव का अंतिम संस्कार किया गया। आदेश के अंतिम संस्कार में जहां एक ओर केवल उनके निकट रिश्तेदार व परिजन ही शामिल हुए, वहीं एहतियातन एसओ बचनसिंह अत्री के नेतृत्व में पुलिस बल भी मौजूद रहा।