37 लैपटॉप चोरी प्रकरण में शक की सुई तहसील कर्मचारियों पर टिकी
खतौली। खतौली तहसील में ताले में बंद नजारत स्टोर से 37 लैपटॉप चोरी के मामले में अभी तक कोई प्रगति नहीं हो सकी है। नाजिर ने थाने में डुप्लीकेट चाबी बनाकर लैपटॉप चोरी होने का मुकदमा दर्ज कराया था। पुलिस पिछले नौ महीनों से इस चोरी की घटना की जांच पड़ताल कर रही है। पुलिस की जांच पड़ताल में आखिर में शक की सुई आकर तहसील कर्मचारियों पर ही टिक जाती है। पुलिस का यहां तक कहना है कि ताला बंद नजारत स्टोर से लैपटॉप चोरी कैसे हो सकते हैं। यह चोरी की घटना पुलिस के गले भी नहीं उतर पा रही है।
वर्ष 2013 में तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की सरकार ने तहसील क्षेत्र के लिए 628 लैपटॉप इंटरमीडिएट उत्तीर्ण छात्र-छात्राओं में वितरित करने के लिए दिए गए थे, जिनमें से सपा सरकार में 591 लैपटॉप बांट दिए गए थे। अधिकारिक सूत्रों के मुताबिक पात्र छात्र-छात्राओं के कागजातों में कमी होने की वजह से 37 लैपटॉप नहीं वितरित हो सके थे। इन लैपटॉप को उस वक्त नवनिर्माणाधीन तहसील के नजारत स्टोर में रख दिया गया था। वर्ष 2017 में प्रदेश में भाजपा सरकार बनी। इन लैपटॉप को वितरित नहीं किया और न ही डीआईओएस कार्यालय में जमा कराए गए। पिछले चार साल से ये लैपटॉप नाजिर की देखरेख में रहे। लैपटॉप चोरी होने की घटना भी 26 जनवरी को पता चली। आनन फानन में नाजिर की ओर से थाने में चोरी का मुकदमा दर्ज कराया गया था, जिसमें लिखा गया था कि नजारत स्टोर की डुप्लीकेट चाबी बनाकर लैपटॉप चोरी किए गए हैं। पिछले नौ महीने से पुलिस चोरी की घटना की जांच पड़ताल करने में जुटी है। पुलिस की माने तो जांच पड़ताल करने पर आखिर में शक की सुई तहसील कर्मचारियों पर आकर घूम जाती है। विवेचक एसआई बिजेंद्र सिंह का कहना है कि जांच पड़ताल में पता चलता है कि इस चोरी की घटना में तहसील कर्मचारी का ही हाथ हो सकता है। नजारत स्टोर का न तो ताला तोड़ा गया, कुंबल किया गया और न ही खिडक़ी तोड़ी गई। इससे प्रतीत होता है कि नजारत स्टोर की देखरेख करने वाले कर्मचारी का इस चोरी की घटना में हाथ हो सकता है। शीघ्र ही जांच पड़ताल कर घटना का खुलासा कर दिया जाएगा।