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हमले बढ़े पर कार्रवाई भी सख्त

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पुलिस टीम पर हमले बढ़े पर कार्रवाई भी सख्त
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मुजफ्फरनगर। पुलिस टीम पर हमले पिछली सपा सरकार में हुए और अब भाजपा शासनकाल में भी हो रहे हैं। खास बात यह है कि सपा सरकार के मुकाबले भाजपा की योगी सरकार में कार्रवाई मजबूती से हो रही है। कई ऐसे मामले हैं, जिनमें सपा सरकार में पुलिस को जांच ठंडे बस्ते में डालनी पड़ी। राजनीतिक लोगों के दबाव के चलते पहले पुलिस के कदम ठिठकते रहे हैं। योगी सरकार में कम से कम ऐसा कुछ नजर नहीं आ रहा है।
जिले के कुछ ऐसे मामलों पर नजर डालें तो सपा और भाजपा सरकार की कार्रवाई में फर्क साफ नजर आता है। 13 अप्रैल 2016 को रतनपुरी के नंगला में हत्यारोपी मुन्नवर को पकड़ने गई पुलिस पर ग्रामीणों ने हमला कर दरोगा का सर्विस रिवाल्वर छीन लिया था और पुलिस पार्टी की पिटाई कर दी थी। दरोगा का हाथ टूट गया था। संगीन धाराओं में 23 लोग नामजद और 25 अज्ञात के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज हुई थी। इस मामले में 20 लोगों को गिरफ्तार कर पुलिस ने जेल भेजा था। इसके बाद से राजनीतिक खेल शुरू हो गया। दबाव के चलते मामले में कार्रवाई ज्यों की त्यों पड़ी हुई है।
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इसी अप्रैल माह में ही खतौली के मोहल्ल्ला देवीदास में हुए सांप्रदायिक बवाल के दौरान मौके पर पहुंची पुलिस पर भीड़ ने हमला बोल दिया था, जिसमें चोट लगने से खतौली कोतवाली का दरोगा घायल हो गया था। घटना में पुलिस ने आरोपी गौरा वाल्मीकि पर रासुका के तहत कार्रवाई की थी और एक दर्जन लोगों को जेल भेज दिया था। बाद में यह मामला खटाई में पड़ गया। बाकी आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं हो पाई। इसी तरह सितंबर 2016 में मंसूरपुर के पुरबालियान में छेड़खानी के आरोपी को पकड़ने गई पुलिस पर ग्रामीणों ने हमला बोल दिया था, जिसमें एक सिपाही चोट लगने से घायल हो गया था। बाद में भारी पुलिस बल ने गांव में दबिश दी थी।
पिछले साल 24 जून को शहर कोतवाली के खालापार चौकी पर गोकशी के आरोपियों ने हमला कर तोड़फोड़ कर दी थी। आरोपियों ने दरोगा पर धार्मिक टिप्पणी करने का आरोप लगाया था। बाद में आरोप झूठा पाया गया। यह मामला भी सपा नेताओं के दबाव में रफादफा कर दिया गया।
भाजपा सरकार में मामला उलट है। पुलिस पर हमले हो रहे हैं, लेकिन नामजदगी और गिरफ्तारियां भी सख्ती के हाथ हो रही हैं। तीन जून को शेरपुर में गोकशी की सूचना पर पहुंची पुलिस पर ग्रामीणों ने हमला कर वाहनों में आग लगा दी थी। पुलिस ने 20 नामजद और 250 अज्ञात सहित 270 के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर 13 लोगों को जेल भेज दिया था। 12 जून को छपार में गोकशी की सूचना पर पहुंची पुलिस पर ग्रामीणों ने हमला बोला तो दरोगा तारिक वसीम और एचसीपी बिशंभर सिंह घायल हो गए थे। पुलिस ने तीन महिलाओं सहित छह लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की थी। इस मामले मेें अभी तक कोई गिरफ्तारी नहीं हो पाई है। 24 जून को काटका में बैल काटे जाने की सूचना पर पहुंची पुलिस पर आरोपियों ने हमला बोला, तो एसएसआई और दो सिपाही चोट लगने से घायल हो गए। पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। मंगलवार को गोकशी की सूचना पर पुुलिस पर हमला हुआ तो पुलिस ने 17 नामजद और 25-30 अज्ञात के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर दी। इस मामले में पुलिस ने दस लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। मामले में पुलिस रासुका लगाने की तैयारी में जुट गई है। पूरी फार्म में आने लगी नजर पुलिस
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मुजफ्फरनगर। खालापार प्रकरण में मंगलवार सुबह हुए हमले के बाद बैकफुट पर आई पुलिस बुधवार शाम पूरी फार्म में नजर आई। कस्सावान के दस आरोपियों को जेल भेजने के बाद शहर कोतवाली पुलिस ने शेरपुर को अपने रडार पर ले लिया है। शेरपुर मामले में पुलिस ने चार नामजद और नौ अज्ञात को जेल भेजा था। बाद में ग्रामीणों ने गिरफ्तारी पर स्टे ले लिया था। पुलिस का कहना है कि स्टे की अवधि खत्म हो चुकी है। रात में पुलिस की शेरपुर में दबिश देने की तैयारी चल रही है।
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