आठ नवंबर 2016 को नोटबंदी का आदेश देशवासियों पर मुसीबत बन गया था, लेकिन जनपद के कुछ सराफा कारोबारियों ने लाखों के वारे-न्यारे किए। जिले में नोटबंदी के वक्त हवाला कारोबार, सोना सप्लायरों की मौज आ गई। इस खेल में आदिश और अंकित भी उतर गए। बताते हैं कि नोटबंदी के दौरान पुराने नोटों में (50000) की एक गड्डी के बदले 10 ग्राम सोना बेचा गया। यह सोना खाड़ी देशों के अलावा बड़े कारोबारियों से मिलता था।
क्राइम कैपिटल के रूप में विख्यात मुजफ्फरनगर का नाम अब आतंकियों को फंडिंग करने में जुड़ा है। इस खेल में सराफा कारोबारियों के तार हवाला कारोबार से जुड़ने पर लश्कर-ए-तैयबा को पैसा पहुंचाया गया है। खास यह है कि नोटबंदी के बाद जहां देशभर में हा-हाकार मचा था, वहीं इस मौके को जनपद में पूरी तरह भुनाया गया।
पुराने नोट बदलने की लाइन में लगे लोगों ने बैंक के चक्कर छोड़ सोने की खरीदारी को तवज्जो दी। सराफा बाजार में नोटबंदी के वक्त 10 ग्राम सोना 30,000 के बजाये 50,000 रुपये में दिया गया है। इस काम में कई सर्राफ जुड़े, जो वर्षभर में अमीरी रेखा के पायदान पर पहुंच गए।
बताते हैं कि नोटबंदी में ही अंकित गर्ग और आदिश कुमार जैन ने बड़े पैमाने पर पैसे बटोरे थे। इन दोनों कारोबारियों ने भी सोने के बदलने पुरानी करेंसी दी थी। जिसे बाद में नए नोटों में हवाला कारोबारियों के माध्यम से बदला गया। नोटबंदी कुछ कारोबारियों के लिए बंद पड़े किस्मत के दरवाजे खोलने वाला साबित हुआ। जिले में बड़ी तादाद में सोने (गोल्ड) की खपत की गई।
इसके अलावा भारतीय मुद्रा को कई देशों की करेंसी से बदला गया है। बताया गया है कि पिछले पांच सालों में अंकित गर्ग का कारोबार तेजी से बढ़ा है। जिसके चलते भगत सिंह रोड पर तीन साल पहले सराफा की नई दुकान की थी। एनआईए इसकी गहराई से जांच कर रही है, यहां से कितने लोगों को रकम दी गई और कितने लोगों से सोना लिया गया है।
इसके अलावा भी छापेमारी में दोनों के यहां से भारी तादाद में लगभग 48 लाख रुपये बरामद हुए थे। एनआईए ने विदेशी पिस्टल, इलेक्ट्रोनिक डिवाइस लैपटॉप, मोबाइल आदि भी जब्त किए हैं। अब वर्ष 2016 से 2018 तक किए गए कारोबार और लेनदेन की जांच होगी। जिसमें दोनों कारोबारियों की स्थिति साफ हो सकेगी। हालांकि सबसे बड़ा सवाल है कि लगातार जिले में आतंकी गतिविधियां सामने आ रही हैं, मग स्थानीय खुफिया तंत्र पूरी तरह विफल साबित हुआ है।
आदिश से हुई थी शहर में लूट
वर्ष 2016 में सराफा आदिश कुमार जैन से एक करोड़ से अधिक रुपये की लूट हुई थी। पुलिस को 20 लाख रुपये और एक सोने की चेन लूटना बताया गया था। अब एनआईए इस बात की तफ्तीश कर रही है कि आदिश के पास यह रकम कहां से आई और रकम को किसे दिया जाना था। इस लूट के पुराने रिकार्ड को भी खंगाला जा रहा है।
अभी और भी शामिल हैं खेल में
सूत्रों के अनुसार हवाला कारोबार और नोटबंदी में अवैध रुपये से सोने का लेनदेन करने वाले और भी लोग शामिल हो सकते हैं। सोना-चांदी देकर रुपये लेना और रुपयों के बदले सोना लेने का खेल हो रहा है। यह सोना बिस्कुट, अन्य आभूषणों की शगल में आता है।