मुजफ्फरनगर। आदेशों की अवहेलना और वसूली वारंटों की तामील नहीं कराए जाने के कारण परिवार न्यायालय ने बागपत के बड़ौत थानाध्यक्ष पर 50 रुपये का अर्थदंड लगाया है। थानाध्यक्ष को कई अवसर दिए जाने के बावजूद वह न्यायालय में उपस्थित नहीं हुए और न ही अपना पक्ष प्रस्तुत किया।
प्रधान न्यायाधीश खलीकुज्जमा ने यह आदेश बीएनएसएस की धारा 388 के अंतर्गत दिए। अर्थदंड की यह राशि थानाध्यक्ष बड़ौत के वेतन से वसूल की जाएगी। वसूली के लिए एसपी बागपत और मुख्य कोषाधिकारी बागपत को पत्र भेजे जाने के निर्देश दिए गए हैं। वाद इसी साल 12 मार्च को थानाध्यक्ष बड़ौत के विरुद्ध संस्थित किया गया था। न्यायालय ने उन्हें रजिस्ट्री के माध्यम से नोटिस भेजे थे, जो उन्हें प्राप्त भी हुए । इसके बावजूद थानाध्यक्ष न्यायालय में उपस्थित नहीं हुए और न ही कोई जवाब दिया।
-
इनसेट
दंपती के विवाद में तामील नही कराए वारंट
भौराकलां थाने में दंपती के बीच प्रकरण की प्राथमिकी भौराकलां थाने में दर्ज कराई गई थी। युवक अंकित तोमर बड़ौत का रहने वाला है। न्यायालय की ओर से वसूली वारंट तामील करने के आदेश दिए गए लेकिन पुलिस ने वारंट तामाली नहीं कराए थे।
-
इनसेट
धारा 388 बीएनएसएस का प्रावधान
यदि कोई साक्षी या व्यक्ति दस्तावेज प्रस्तुत करने या प्रश्नों का उत्तर देने से इन्कार करता है। उचित कारण प्रस्तुत करने का अवसर मिलने पर भी ऐसा नहीं करता है तो न्यायालय उसे सात दिन तक के सादे कारावास या न्यायालय अधिकारी की अभिरक्षा में भेज सकता है। यह तब तक होता हैए जब तक वह व्यक्ति परीक्षा देने या दस्तावेज प्रस्तुत करने के लिए सहमत नहीं हो जाता।