शिया पर्सनल बोर्ड के अधिवेशन में बोलते वक्ता।
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ऑल इंडिया शिया पर्सनल लॉ बोर्ड का एक दिवसीय अधिवेशन आयोजित किया गया। जिसमें वक्ताओं ने कहा कि कौम की राजनीति, शिक्षा में मुकम्मल भागीदारी से ही तरक्की होगी। हक पाने के लिए संघर्ष करना होगा, तभी सरकारें उनका हिस्सा वाजिब हक दे सकेंगी। साथ ही सच्चर कमेटी की रिपोर्ट पर भी ऐतराज उठाया गया। रिपोर्ट में शिया समुदाय की अनदेखी के आरोप लगाए गए। सच्चर कमेटी की तरह शियाओं के लिए अलग से कमीशन बनाए जाने की मांग उठाई गई।
ऑल इंडिया शिया पर्सनल लॉ बोर्ड के प्रवक्ता मौलाना यासूब अब्बास ने कहा कि मंदिर-मस्जिद विवाद को दोनों समुदाय आपसी बातचीत से हल करें, ताकि विवाद की वजह से देश के भविष्य पर कोई प्रभाव न पड़े। उन्होंने कहा कि तीन तलाक के मसले पर बोर्ड भी अपना पक्ष सुप्रीम कोर्ट में रखेगा। बोर्ड भी एक साथ तीन तलाक कहने के विरोध में है। साथ ही कहा कि पर्सनल लॉ बोर्ड में दखलंदाजी बर्दाश्त नहीं होगी। वक्ताओं ने कहा कि सच्चर कमेटी की रिपोर्ट में शिया समुदाय की अनदेखी की गई। इसमें शियाओं की समस्याएं और जरूरतों को नहीं बताया गया है। इसलिए सच्चर कमीशन की तर्ज पर अलग से कमीशन बनाया जाए।
उन्होंने कहा कि अल्पसंख्यकों को मिलने वाला हिस्सा भी शिया समुदाय तक नहीं पहुंच पाता है। हज के मौके पर शिया हाजियों के लिए अलग से समुदाय के मौलाना की व्यवस्था की जाए। इसके बाद वक्ताओं ने कहा कि कौम के युवा शिक्षा और राजनीति में अपना कदम बढ़ाएं, ताकि कौम तरक्की की राह पर आ सके। भारत में शियाओं की बड़ी तादाद होने के बाद भी कई क्षेत्रों में भागीदारी कम है, जिससे नुकसान हो रहा है। अधिवेशन में मौलाना असद रजा, शबाब जैदी, मौलाना मोहम्मद हुसैन हुसैनी, मौलाना फसीह हैदर, एसएम जाफरी आदि मुख्य रूप से मौजूद रहे।