मीरापुर। रामराज थाना क्षेत्र के गांव हाशिमपुर के जंगल में करीब दस दिन पहले भेड़-बकरी चराने गए बुजुर्ग के साथ मारपीट की गई थी, बुजुर्ग की दिल्ली के अस्पताल में उपचार के दौरान मंगलवार को मौत हो गई।
शव गांव पहुंचने पर पीड़ित परिजनों और आसपास के ग्रामीणों ने जमकर हंगामा किया। पुलिस ने दो युवकों के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज कर लिया, इसके बाद ही लोग शांत हुए। तनाव के मद्देनजर गांव में पुलिस बल तैनात किया गया है।
हाशिमपुर निवासी खेमचंद (60) नौ जनवरी को जंगल में भेड़-बकरी चराने गया था। खेतों में भेड़ बकरियों के घुसने पर कुछ युवकों ने खेमचंद को मारपीट कर घायल कर दिया था।
देर शाम तक खेमचंद के वापस न आने पर परिजनों ने जंगल में तलाश किया तो खेमचंद गांव के ही मंगल पुत्र दयाचंद के खेत मेें बेहोशी की हालत में मिला। उसके पुत्र तेजपाल ने अज्ञात लोगों के विरुद्ध जानलेवा हमले की रिपोर्ट दर्ज कराई थी।
खेमचंद को बेहोशी की हालत में दिल्ली के लोकनायक जयप्रकाश नारायण अस्पताल में भर्ती कराया गया। सोमवार को खेमचंद की अस्पताल में ही मौत हो गई। मंगलवार को पोस्टमार्टम के बाद दिल्ली से शव हाशिमपुर पहुंचा तो परिवार में कोहराम मच गया।
मृतक के पुत्र ने अपने पिता की हत्या के आरोप में गांव के ही दो युवकों शुभम पुत्र हेमसिंह और सुमित पुत्र नीटू पर लगाते हुए हंगामा किया।
दो पक्षों में टकराव की सूचना पर एसडीएम जानसठ उमेश कुमार मिश्रा और एएसपी कुंवर अनुपम सिंह कई थानों की फोर्स लेकर गांव पहुंचे। हंगामे की सूचना पर भाजपा जिलाध्यक्ष सतपाल पाल, भाजपा नेता वीरेंद्र सिंह कुतुबपुर, ओमप्रकाश पाल आदि नेताओं के साथ आसपास के गांवों के काफी लोग मौके पर आ गए।
पुलिस अधिकारियों और नेताओं के बीच हुई बातचीत के बाद पुलिस ने दो दिन के अंदर खेमचंद के हत्यारों की गिरफ्तारी का भरोसा दिया।
उधर, एसडीएम ने मृतक के परिजनों को अपने स्तर से 30 हजार रुपये की अनुदान राशि देने और पांच लाख रुपये मुख्यमंत्री राहत कोष से दिलाने की संस्तुति करने का वायदा किया। इस आश्वासन के बाद ही परिजनों ने शव का दाह संस्कार किया।
शांति व्यवस्था के मद्देनजर गांव में पुलिस बल तैनात है। उधर, आरोपी परिवार के लोगों का कहना है कि उनके बच्चों को बेवजह फंसाया जा रहा है। घटना में इनका हाथ नहीं है।