अतिक्रमण हटाओ अभियान के दौरान भाजपा नेता की पिटाई के मामले में सिटी मजिस्ट्रेट की जिले से आखिरकार विदाई हो गई। डीएम की शासन स्तर पर उनके पक्ष में की गई पैरवी भी काम नहीं आई।
शहर में प्रतिदिन जाम की स्थिति को देखते हुए चलाया गया अतिक्रमण हटाओ अभियान चर्चाओं में रहा। अभियान को लेकर पहले दिन से ही व्यापारियों और अफसरों में तनातनी रही। अभियान के दौरान भगत सिंह रोड पर व्यापारियों और प्रशासन में टकराव हो गया था।
सिटी मजिस्ट्रेट वैभव मिश्रा और व्यापारियों के बीच लगातार झड़प होती रही। इस बीच भाजपा नेता सुनील तायल के बाहर का अतिक्रमण हटाने को लेकर बवाल हुआ। सिटी मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में पुलिस ने भाजपा नेता और उसके बेटे को सड़क पर पीटा था, जिसके बाद भाजपा सांसद संजीव बालियान और विधायक कपिलदेव अग्रवाल को व्यापारियों के बीच में जाना पड़ा। व्यापारी लगातार सिटी मजिस्ट्रेट का तबादला कराने का दबाव बना रहे थे।
व्यापारियों के दबाव के चलते विधायक कपिलदेव अग्रवाल ने मुख्यमंत्री के सामने मामला रखा। उन्होंने सिटी मजिस्ट्रेट का तत्काल तबादला करने की मांग की। शासन ने जब डीएम से प्रकरण के बारे में पूछा तो उन्होंने कहा कि सिटी मजिस्ट्रेट सरकार का ही कार्य कर रहे थे। शासन स्तर पर डीएम राजीव शर्मा ने उनकी पैरवी की। शासन से जारी पीसीएस अधिकारियों की सूची में सिटी मजिस्ट्रेट का नाम आने से यह स्पष्ट हो गया है कि शासन ने डीएम की पैरवी को नहीं माना। कुल मिलाकर सिटी मजिस्ट्रेट वैभव मिश्रा अतिक्रमण हटाओ अभियान की भेंट चढ़ गए।
ये तो प्रमोशन हो गया
सिटी मजिस्ट्रेट वैभव मिश्रा को कानपुर का नगर मजिस्ट्रेट बनाया गया है। कानपुर जैसे बड़े शहर में तबादले को अधिकारी वर्ग उनका प्रमोशन मान रहा है। भाजपा नेता भले ही इस बात से खुश हो कि उन्होंने मिश्रा का तबादला करा दिया, लेकिन पद से ऐसा लगता है कि उनका डिमोशन नहीं प्रमोशन हुआ है।