स्मार्टफोन नहीं होने से बच्चों की पढ़ाई प्रभावित
मुजफ्फरनगर। कोरोना महामारी ने इस वर्ष स्कूली बच्चों की पढ़ाई को पूरी तरह प्रभावित कर दिया। स्कूलों के बंद होने पर विकल्प के रूप में ऑनलाइन पढ़ाई सीबीएसई स्कूलों में तो किसी हद तक सफल होती दिखाई दी, लेकिन परिषदीय और माध्यमिक स्कूलों में बच्चों के परिवारों के सामने आर्थिक समस्याएं आडे़ आ गई। डिग्री कॉलेजों में भी 50 प्रतिशत छात्र ही ऑनलाइन पढ़ाई कर पाए। स्मार्टफोन और इंटरनेट की समस्या छात्रों के सामने अधिक रही।
जिले के परिषदीय विद्यालयों में एक लाख 44 हजार 749 छात्र-छात्रा अध्ययनरत हैं। ड्रापआउट 2992 बच्चों में से 2500 का एडमिशन कराया गया है। बीएसए मायाराम के मुताबिक ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनो तरीके से 22 प्रतिशत बच्चे ही प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्कूलों से जुड़े हैं। उन्होंने माना कि गरीब परिवारों के बच्चों के पास स्मार्टफोन नहीं है। कई बच्चे स्कूल आकर शिक्षकों से होमवर्क लेकर घर जाते हैं। कुछ रेडियो और टीवी के माध्यम से पढ़ रहे हैं।
जिले के माध्यमिक स्कूलों के विद्यार्थियों को ऑनलाइन पढ़ाई के लिए व्हाट्सएप ग्रुप, वीडियो के माध्यम से जोड़ा गया। डीआईओएस गजेंद्र कुमार का कहना है कि इनमें 56 प्रतिशत बच्चे जुड़े हैं। इस समय अभिभावक की अनुमति से कॉलेजों में बच्चे आ रहे हैं। इनमें 40 प्रतिशत तक उपस्थिति आ रही है। विभिन्न माध्यमों से विभाग अब तक 83 प्रतिशत बच्चों से जुड़ पाया है। चांदपुर में बनाए जाने वाले राजकीय इंटर कॉलेज का प्रस्ताव शासन में लंबित है।
जिले की डिग्री कॉलेजों में ऑनलाइन के माध्यम से पढ़ाई की गई। कॉलेजों में शिक्षकों ने छात्र-छात्राओं के ग्रुप बनाकर उन्हें लेक्चर की वीडियो डाले। जनपद के डिग्री कॉलेजों में साठ प्रतिशत तक विद्यार्थी इससे जुड़े। कॉलेजों में ऑफलाइन कक्षाओं के शुरू होने पर प्रथम वर्ष के विद्यार्थी अच्छी संख्या में आ रहे हैं। अन्य कक्षाओं के छात्रों की संख्या दस से 20 प्रतिशत के बीच है। छोटूराम डिग्री कॉलेज के प्राचार्य डॉ नरेश मलिक का कहना है कि इस समय कॉलेजों में ऑनलाइन और ऑफ लाइन दोनो प्रकार की कक्षाएं चल रही हैं।
गांवों में नहीं चलता इंटरनेट
जनता इंटर कॉलेज भोपा के कक्षा 12 के छात्र गांव निजामपुर के बोबी कुमार का कहना है कि उसके पास अपना मोबाइल नहीं है। परिवार के एक सदस्य का मोबाइल स्कूल में रजिस्टर्ड कराया है। शाम को जब मोबाइल चलाने का प्रयास करते हैं, तो इंटरनेट काम नहीं करता। कॉलेज बंद होने से उसकी बोर्ड की परीक्षा प्रभावित हुई है। कॉलेज में पढ़ाई शुरू होने पर अब कॉलेज जाना शुरू किया है।
धीराहेड़ी गांव के कक्षा 12 के छात्र लविश राठी का कहना है कि उसके पास स्मार्टफोन नहीं है। परिवार के लोग फोन दिलाने की स्थिति में नहीं हैं। ऐसे में कोरोना के चलते उसकी पढ़ाई को बहुत नुकसान हुआ है। अब कॉलेज में जाकर पढ़ाई शुरू की है।
कॉलेजों में दस प्रतिशत तक ही उपस्थिति
डीएवी इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य शिव कुमार यादव का कहना है कि कॉलेज में ऑनलाइन पढा़ई के लिए रजिस्टर्ड तो 85 प्रतिशत बच्चे हैं, लेकिन जो पाठ्यक्रम डाला जा रहा है उसे पढ़ने वालों की संख्या जनता इंटर कॉलेज भोपा के प्रधानाचार्य राकेश कुमार का कहना है कि कॉलेज में ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनो तरह से पढ़ाई हो रही है। कुछ ऐसे निर्धन छात्र हैं, जिनके पास स्मार्टफोन नहीं है, उनके लिए हल निकाला जा रहा है। सामान्य स्थिति के मुकाबले पढ़ाई प्रभावित तो हुई ही है।