- सामान्य परीक्षा की तरह ही शामिल हों, खुश रहकर दें इम्तिहान
संवाद न्यूज एजेंसी
मुजफ्फरनगर। बोर्ड परीक्षा सिर्फ जिंदगी की नई शुरूआत की पहली दहलीज है। बोर्ड परीक्षा के अंक जिंदगी में सफलता और असफलता के लिए ज्यादा मायने नहीं रखते। ऐसे उदाहरण भी हैं, जब कम अंक पाकर भी परीक्षार्थियों ने भविष्य में नई ऊंचाइयों को छूने का काम किया। शिक्षक कहते हैं कि परीक्षा कोई भी हो, कभी भी परेशान नहीं होना चाहिए। परीक्षा की तैयारी मन लगा कर करें और बहादुरी से ही परीक्षा में शामिल हो।अगर कोई चूक हो भी गई है तो अगली बार सुधार करें। बहादरपुर की घटना ने लोगों को झकझोर कर रख दिया है। अभिभावक भी अपनी जिम्मेदारी को समझें।
बच्चा तनाव में है तो काउंसिलिंग कराएं
मनोविज्ञान की शिक्षिका अनुराधा पंवार का कहना है कि यदि किसी अभिभावक को यह लगता है कि उनके बच्चे की परीक्षा को लेकर मानसिक स्थिति ठीक नहीं है तो वह छात्र की काउंसिलिंग कराए। मॉ-बाप को धैर्य के साथ छात्र से व्यवहार करना चाहिए। अधिक उतावलापन नहीं दिखाना चाहिए। हमारे बच्चों का जीवन सबसे पहले हैं। परीक्षा के दौरान हमेशा बच्चों के साथ बनें रहे।
जीवन है अनमोल
अभिभावक नीटू उपाध्याय का कहना है कि यदि पहला पेपर खराब हो जाता है, अगले पेपर की अच्छी तैयारी करनी चाहिए। छात्रों को घबराना नहीं चाहिए। आत्महत्या जैसा कदम कभी नहीं उठाना चाहिए। छात्र को समस्या हो तो अपने अभिभावक और शिक्षक से जरूर शेयर करें।
जान देना समस्या का हल नहीं
इंटरमीडिएट के छात्र वंश काकरान का कहना है कि आत्महत्या किसी समस्या का हल नहीं है। हमें परिस्थितियों का मुकाबला करना चाहिए। पेपर खराब होने पर आगे के लिए अच्छे का प्रयास करना चाहिए।
बहादरपुर की घटना चिंताजनक
शिक्षिका ममता का कहना है कि जीवन देना किसी समस्या का हल नहीं है। समय और परिस्थिति बदलती रहती है। बहादरपुर जैसी घटना समाज के लिए चिंताजनक है। अभिभावकों को भी अपने बच्चों पर अधिक दबाव नहीं बनाना चाहिए।