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बदल रही जलवायु से बिगड़ा फसल उत्पादन    

Thu, 01 Dec 2016 12:46 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/ मुजफ्फरनगर
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कृषि मेले के समापन पर मौजूद अति‌थि। - फोटो : अमर उजाला
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राजकीय इंटर कालेज के मैदान में चल रहे कृषि मेले का बुधवार को समापन हुआ। कृषि वैज्ञानिकों ने कहा कि जलवायु में लगातार बदलाव देखे जा रहे हैं, जिसका जीवों के साथ फसलों पर भी विपरीत प्रभाव पड़ रहा है। किसान एक ही फसल पर निर्भर न रहें, खेतों में जैविक खाद का अधिक इस्तेमाल करें। इससे फसल और खेत की उर्वरकता बढ़ेगी। समापन पर पशु पालक और किसानों को पुरस्कार भी दिए गए।       
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भारतीय कृषि प्रणाली अनुसंधान संस्थान मोदीपुरम के तत्वावधान में चले तीन दिवसीय कृषि मेले में छह राज्यों के किसानों, पशुपालकों ने भाग लिया। गोष्ठी में कृषि वैज्ञानिकों ने कहा कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में ठंड पहले आती है और देर तक टिकती है। लेकिन, पिछले कुछ सालों से ऐसा नहीं हो रहा है। जिसका असर गेहूं बुआई समेत अन्य फसलों पर पड़ रहा है। आईसीएआर के वैज्ञानिक डॉ जेबी डबास ने कहा कि कीटनाशक दवाइयों के प्रयोग से खेत समेत फसलों की उर्वरकता खत्म हो रही है।

किसान जैविक खाद की ओर ध्यान दें। डॉ वीके सिंह ने बदलते पर्यावरण में किसानों को खेती की नई तकनीकियों के बारे में विस्तार से बताया। इससे फसलों के उत्पादन में भी बढ़ोत्तरी होगी। दोपहर को मेले का समापन हुआ। जिसमें समाजसेवी डॉ सुरेन्द्र सिंह और राकेश टिकैत मुख्य अतिथि रहे। चौधरी छोटूराम कालेज के प्राचार्य नरेश मलिक ने भी विचार रखे।  
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कृषि प्रणाली संस्थान के निदेशक डॉ आजाद सिंह पंवार ने संस्थान के कार्यो का संक्षिप्त विवरण पेश किया। पुरस्कार वितरण समारोह में क्षेत्र के अग्रणी किसानों, महिला कृषकों, विजेता पशु पालकों को भाकियू के राष्ट्रीय प्रवक्ता चौधरी नरेश टिकैत, डॉ उदयवीर सिंह, अशोक बालियान आदि ने पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया। समापन सत्र में डॉ जगपाल सिंह प्रधान, डॉ. एमपी सिंह, डॉ प्रेम सिंह, डॉ अनिल कुमार, डॉ विनोद कुमार, आदि रहे।       
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