देवबंद (सहारनपुर)। दारुल उलूम की सुप्रीम पॉवर मजलिस-ए-शूरा ने संस्था में बड़ा बदलाव किया है। जमीयत उलमा-ए-हिंद (मौलाना महमूद मदनी गुट) के राष्ट्रीय अध्यक्ष कारी मोहम्मद उस्मान मंसूरपुरी को संस्था का कार्यवाहक मोहतमिम नियुक्त किया है। वहीं संस्था के मोहतमिम मौलाना मुफ्ती अबुल कासिम नोमानी को शेखुल हदीस की अतिरिक्त जिम्मेदारी सौंपी गई। वहीं मौलाना अरशद मदनी को सदर मुदर्रिस बनाया गया है। इसके अलावा बैठक में कई और फैसले लिए गए हैं।
दारुल उलूम के मेहमानखाने में चल रही तीन दिवसीय मजलिस-ए-शूरा (एक्जीक्यूटिव कमेटी) की बैठक बुधवार को पांच चरणों के साथ संपन्न हुई। अंतिम दिन शूरा सदस्यों ने कई अहम फैसलों पर अपनी मुहर लगाई। कोरोना के कारण विगत छह माह से बंद संस्था के बजट में भी छह करोड़ रुपये की कटौती की गई है। इसके चलते अब संस्था का बजट 30 करोड़ रुपये रह गया है। वित्तीय वर्ष 2020-21 में कर्मचारियों की तनख्वाह में बढ़ोतरी न करने का फैसला भी लिया गया है। कांधला के गढ़ी दौलत स्थित मदरसे के मोहतमिम मौलाना आकिल को मजलिस-ए-शूरा का सदस्य नियुक्त किया गया है। संस्था में शैक्षिक कार्य आरंभ करने पर भी शूरा सदस्यों ने मुहर लगाई है। निर्णय लिया गया कि सरकार की गाइड लाइन आने के बाद ही शिक्षण कार्य शुरू किया जाएगा। दारुल उलूम के मोहतमिम मौलाना मुफ्ती अबुल कासिम नोमानी को संस्था का शेखुल हदीस बनाना और कारी मोहम्मद उस्मान मंसूरपुरी को कार्यवाहक मोहतमिम बनाने को लेकर इस्लामिक जगत में चर्चा शुरू हो गई हैं, जबकि सोशल मीडिया पर मोहतमिम बदले जाने की चर्चाएं जोरों पर हैं।
इन सदस्यों की मौजूदगी में हुए अहम फैसले
देवबंद। सांसद मौलाना बदरुद्दीन अजमल, मौलाना रहमतुल्लाह कश्मीरी, मौलाना मुफ्ती अबुल कासिम नोमानी, मौलाना अनवारुल हक बिजनौरी, मौलाना आकिल सहारनपुरी, सैयद हबीब अहमद, मौलाना निजामुद्दीन, मौलाना गुलाम मोहम्मद वस्तानवी, मालेगांव विधायक मौलाना इस्माईल, मौलाना अलीम फारूकी, मौलाना शफीक बंगलूरू, सैयद अंजर हुसैन मियां, मौलाना महमूद, मौलाना मलिक मोहम्मद इब्राहीम, हकीम कलीमुल्लाह अलीगढ़ी, मौलाना निजामुद्दीन आदि बैठक में मौजूद रहे।
जमीयत के दोनों अध्यक्ष संभालेंगे दारुल उलूम में अहम जिम्मेदारी
जमीयत के दोनों गुटों में समझौते के लिए तीन सदस्यीय कमेटी गठित
संवाद न्यूज एजेंसी
देवबंद। जमीयत उलमा-ए-हिंद के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी और मौलाना महमूद मदनी गुट के अध्यक्ष कारी मोहम्मद उस्मान मंसूरपुरी दारुल उलूम में अहम जिम्मेदारी निभाएंगे। यह पहली बार होगा, जब दोनों गुटों के अध्यक्ष को दारुल उलूम में अहम पदों की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
मजलिस-ए-शूरा के सदस्यों ने एक खास रणनीति के तहत दोनों अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी और कारी उस्मान मंसूरपुरी को जिम्मेदारी सौंपी है। इतना ही नहीं चाचा मौलाना अरशद और भतीजे मौलाना महमूद मदनी में सुलह के लिए शूरा सदस्यों ने तीन सदस्य कमेटी की गठन भी किया है। इसमें मौलाना आकिल सहारनपुरी, मौलाना हकीम कलीमुल्लाह अलीगढ़ी और मौलाना हबीब बांदवी हैं।
गौरतलब है कि पिछले लंबे समय से जमीयत दो फाड़ है। इसमें एक जमीयत के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी तो दूसरे गुट में महासचिव मौलाना महमूद मदनी ने कारी उस्मान को अध्यक्ष बनाया है। इतना ही नहीं दोनों गुटों का मामला न्यायालय तक भी पहुंच चुका है। दोनों गुटों में समझौते के लिए पूर्व में भी कई बार प्रयास किए जा चुके हैं, लेकिन आज तक सुलह का कोई रास्ता नहीं बना है। इस बार मजलिस-ए-शूरा ने सुलह के लिए जो कदम उठाया है। उसे बड़ा ही अहम और रणनीति के तहत उठाया गया कदम करार दिया जा रहा है।
सहारनपुर: देवबंद- मौलाना मुफ्ती अबुल कासिम नोमानी (नवनियुक्त शेखुल हदीस)- फोटो : DEVBAND
सहारनपुर: दारुल उलूम देवबंद : कारी उस्मान मंसूरपुरी (नवनियुक्त कार्यवाहक मोहतमिम)- फोटो : DEVBAND
सहारनपुर: दारुल उलूम देवबंद : मौलाना अरशद मदनी (नवनियुक्त सदर मुदर्रिस)- फोटो : DEVBAND
सहारनपुर: दारुल उलूम देवबंद (फाइल फोटो)- फोटो : DEVBAND
सहारनपुर: देवबंद में बैठक संपन्न होने पर मेहमानखाने से बाहर निकलते शूरा सदस्य व सांसद मौलाना बदर?- फोटो : DEVBAND