मुजफ्फरनगर। नगरपालिका में वित्तीय अधिकारों की कानूनी लड़ाई के बीच चेयरपर्सन अंजू अग्रवाल ने 23 सभासदों के बीच पद से इस्तीफे का एलान किया। आरोप लगाया कि उनके खिलाफ षड़यंत्र रचा जा रहा है। शहर के 135 विकास कार्य टेंडर होने के बावजूद रुके हुए हैं। अंतर आत्मा की आवाज पर पद छोड़ने का फैसला किया है।
बृहस्पतिवार को चेयरपर्सन पालिका स्थित अपने कार्यालय पहुंची। सभासदों के बीच अपने कार्यकाल के दौरान आई मुश्किलें और उपलब्धियां गिनाई। बिना किसी का नाम लिए षड़यंत्र रचने का आरोप लगाते हुए कटाक्ष किया कि भाजपा शीर्ष नेतृत्व को आकर देखना चाहिए कि यहां कैसा महिला सशिक्तकरण हो रहा है। अदालत ने दो सितंबर को मेरे वित्तीय अधिकार बहाल कर दिए थे, लेकिन अब तक उन्हें पॉवर नहीं दी गई। ईश्वर का इशारा हुआ है, जिसके बाद वह अपना पद छोड़ रही हैं। एलान के बाद चेयरपर्सन ने शिव चौक पर पहुंचकर पूजा अर्चना की।
इस तरह रहा अग्रवाल का कार्यकाल
- 12 दिसंबर 2017 को शपथ ली
- 20 दिसंबर 2020 को भाजपा में शामिल
- 19 जुलाई 2022 को वित्तीय अधिकार छिने
- 20 जुलाई 2022 से सिटी मजिस्ट्रेट प्रशासक
- 22 सितंबर 2022 इस्तीफे का एलान
यह था मामला
चेयरपर्सन अंजू अग्रवाल ने कांग्रेस के टिकट पर चुनाव जीता था। इसके बाद वह भाजपा में शामिल हुई। टिपर वाहनों की आपूर्ति, वॉल पेंटिंग और सीएमओ ऑफिस के पास कचरा एकत्र कराने के कक्ष के निर्माण प्रकरण में शिकायतों के बाद शासन ने पालिकाध्यक्ष अंजू अग्रवाल के वित्तीय अधिकार सीज कर दिए थे। प्रमुख सचिव अमृत अभिजात ने वित्तीय अधिकारी सीज करने के संबंध में पत्र जारी किया था। शासन के निर्देशों की अवहेलना करने, निर्धारित समयावधि में नोटिस का जवाब उपलब्ध नहीं कराने और पालिका परिषद को वित्तीय हानि पहुंचाने के आरोप लगाए गए थे। हाईकोर्ट से उन्हें राहत मिली, लेकिन शासन ने अब तक वित्तीय अधिकार बहाल नहीं किए हैं।