महर्षि दयानंद की 139वीं पुण्यतिथि पर वार्षिकोत्सव
अमर उजाला ब्यूरो
मुजफ्फरनगर। वैदिक संस्कार चेतना अभियान के संयोजक आचार्य गुरुदत्त आर्य ने कहा कि जातिवाद मिटेगा, तभी राष्ट्र में समानता, एकता और संप्रभुता बनेगी। आचरण के बिना ज्ञान व्यर्थ है।
युग प्रवर्तक, महान समाज सुधारक, आर्य समाज के संस्थापक महर्षि दयानंद सरस्वती की 139वीं पुण्यतिथि पर गांव बहादुरपुर में वार्षिकोत्सव का शुभारंभ देवयज्ञ से हुआ। वेदमंत्रोच्चर से यज्ञ में ग्रामीणों, छात्र-छात्राओं ने आहुतियां दी। यज्ञ ब्रह्म डॉ. धीरज कुमार रहे। यज्ञमान नरेंद्र आर्य को विधि विधान से वानप्रस्थ की दीक्षा देकर नरदेव मुनि नामकरण किया गया। आर्य ने कहा कि ऋषि दयानंद ने गुलामी की दासता में जकड़े भारतीयों में आत्मबोध, आत्मगौरव, स्वाभिमान तथा स्वाधीनता की ज्योत्ति जगाई।
स्वामी आत्मानंद सरस्वती ने कहा कि महर्षि ने अंधविश्वासों का प्रखरता से खंडन किया। प्रचलित मिथ्या धारणाओं को तोड़ा और अनुचित पुरातन परंपराओं पर प्रहार किया। स्वामी विश्वानंद ने कहा कि ऋषि दयानंद ने समाज के लिए वेदों के अध्ययन के द्वार खोल दिए, जिससे भारतीय संस्कृति का पुनरुत्थान का मार्ग प्रशस्त हुआ। स्वामी धर्मानंद ने कहा कि आर्य समाज एक राष्ट्रभक्त संस्था है। ऋषि ने धर्मांतरण पर अंकुश लगाकर मातृभूमि की रक्षा की। भजनोपदेशक घनश्याम प्रेमी ने दशभक्ति गीत सुनाए। विदुषी निकिता आर्या ने ईश्वर भक्ति को प्रेरित किया। आनंद पाल सिंह आर्य, आरपी शर्मा, ब्रज कुमार, राजपाल सिंह आर्य, प्रधानाचार्य राजकुमार, विजेंद्र कुमार, महाशय चंद्रपाल, भूपेंद्र कुमार, आचार्य कुसुमपाल आदि मौजूद रहे।