फायर ब्रिगेड की पुरानी गाड़ियों पर भी चुनावी रंग चढ़ गया है। पुरानी गाड़ियों पर विभाग ने नया रंग-रोगन किया है। हालांकि विभाग को अभी तक तेल के लिए ग्रांट नहीं मिल पाई है। उधर, छह विधानसभा क्षेत्रों को कवर करने लिए विभाग के पास तीन ही गाड़ियां मौजूद हैं, जिन्हें अलग-अलग स्थानों पर तैनात किया जाना है।
जिले में पहले चरण में ही चुनाव होना है। दंगाग्रस्त क्षेत्र होने के कारण वोटरों को साधना और एकजुट करना बड़ी चुनौती है। इसके लिए जनपद में वीवीआईपी नेता, पार्टियों के स्टार प्रचारक भी चुनावी रैलियां करने आएंगे। इनके लिए प्रशासन प्रोटोकॉल के तहत सुरक्षा व्यवस्था दुरुस्त रखता है। व्यवस्था में मेडिकल और फायर ब्रिगेड की ड्यूटी भी महत्वपूर्ण होती है।
ताज्जुब है कि शहर के साथ पांच अन्य विधानसभाओं खतौली, मीरापुर, चरथावल, पुरकाजी, बुढ़ाना में भी जनसभाएं और रैली होगी। लेकिन दमकल विभाग के पास केवल तीन ही गाड़ियां हैं, इन सभी क्षेत्रों को कवर करने के लिए तीनों ही गाड़ियां काफी पुरानी हो चुकी हैं।
जिन्हें चुनावी मौसम में रंग-रोगन कर चमचमाया गया है। फायर ब्रिगेड के सीएफओ एनके सिंह ने बताया कि चुनाव में विभाग के पास पर्याप्त संसाधन हैं। रैली और जनसभा में व्यवस्था के लिए गाड़ियां लगाई जाती हैं। हालांकि हेलीकॉप्टर से आने वाले वीआईपी की सुरक्षा में हेलीपेड पर ही गाड़ी तैनात की जाती हैं। इसकी फीस संबंधित आयोजक से ली जाती है।
ग्रांट का भी अता-पता नहीं
फायर ब्रिगेड विभाग को हर चुनाव में स्पेशल ग्रांट मिलती है। जिसके बल पर डीजल और गाड़ियों की मेंटीनेंस होता है। जिला पंचायत चुनाव में भी विभाग को 60 हजार रुपये की ग्रांट दी गई थी। जिसके जरिए 24 घंटे सुविधा को दुरुस्त रखा गया। इस बार विधानसभा चुनाव के लिए विभाग को अभी तक ग्रांट नहीं मिली है। ग्रांट के बिना विभाग के सामने परेशानी खड़ी हो सकती है।
शामली-सहारनपुर पर निर्भरता
चुनावी मौसम में फायर ब्रिगेड ड्यूटी में रहने के साथ यदि क्षेत्र, शहर में कोई भीषण हादसा होता है। खुद की तीनों गाड़ियों को लगाने के साथ ही विभाग सहारनपुर, शामली के अलावा मेरठ से भी मदद लेता है। क्योंकि विभाग में बड़ा टैंक साढ़े छह हजार लीटर है। बाकी दोनों छोटे टैंक साढ़े तीन हजार लीटर पानी की क्षमता वाले हैं।