पुरकाजी कस्बे से नहीं गुजरती बसें, यात्री परेशान
पुरकाजी। कस्बे के अंदर लंबे रूट की बसें नहीं आने से कस्बे व क्षेत्र के लोग परेशान हैं। कई बार अधिकारियों व जन प्रतिनिधियों से शिकायत के बावजूद समस्या का समाधान नहीं होने से लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
सात वर्ष पूर्व पुरकाजी बाईपास बनने के बाद से ही उत्तराखंड व उत्तर प्रदेश रोडवेज की लंबे रूट की बसें कस्बे के अंदर न आकर बाईपास से गुजरनी शुरू हो गईं थीं। तभी से मेरठ, दिल्ली, हापुड़, बुलंदशहर, हरियाणा, राजस्थान देहरादून आदि अन्य शहरों में जाने वाले यात्रियों को करीब दो किलोमीटर दूर बाईपास पर जाकर बसें पकड़नी पड़ती हैं। हाल यह है कि रात्रि में अगर किसी को आपातकाल में बाहर जाना पड़े तो परेशानी का सामना करना पड़ता है। इसके अलावा बाहर से कस्बे में आने वाले यात्रियों को बसों के चालकों द्वारा पुरकाजी बाईपास पर उतार देने के कारण उन लोगों को दो किलोमीटर पैदल चलकर अपने घरों पर आना पड़ता है।
सबसे अधिक परेशानी रात में होती है। महिलाओं व बच्चों को बाईपास से कस्बे तक पैदल आकर आना पड़ता है। रात में कोई आपराधिक वारदात होने की आशंका भी बनी रहती है। कई बार यात्रियों व बसों के चालकों, परिचालकों में विवाद भी हो चुके हैं। मगर रोडवेज कर्मियों की हिटलर शाही के चलते यात्रियों को जबरदस्ती बाईपास पर उतार दिया जाता है। भारत भूषण खुल्लर, अर्जुन गुप्ता, रोबिन गोयल, इरशाद फरीदी, कपिल मित्तल वंश अग्रवाल, ललित सिंघल आदि का कहना है कि, लंबे रूट की बसों के कस्बे के अंदर नहीं आने से लोग परेशान हैं। उन्होंने परिवहन विभाग के अधिकारियों से लंबे रूट की बसों का संचालन कस्बे के अंदर से करने की मांग की है।
अधिकारियों को बताया जा चुका है
नगर चेयरमैन जहीर फारूकी का कहना है कि इस संबंध में कई बार आरएम रोडवेज को समस्या से अवगत कराया जा चुका है। मगर आज तक समाधान नहीं हुआ है।