मुजफ्फरनगर। केंद्रीय बजट में अटल टिंकरिंग लैब का पांच साल का रोडमैप दिया गया है। सरकारी स्कूलों में 50 हजार नई लैब स्थापित किए जाने का प्रावधान है। माध्यमिक स्कूलों को ब्रॉडबैंड से जोड़ा जाएगा। उच्च शिक्षा के लिए भारतीय भाषाओं में डिजिटल किताबें उपलब्ध कराने की योजना है।
डीएवी कॉलेज की छात्रा गुंजन का कहना है कि कुछ बेहतर प्रावधान किए गए हैं लेकिन राष्ट्रीय शिक्षा नीति में यह लक्ष्य रखा गया था कि शिक्षा पर देश की जीडीपी का छह प्रतिशत खर्च किया जाएगा। बजट में आवंटन केवल तीन प्रतिशत ही रहा। फंड की कमी के कारण सरकारी स्कूलों की हाल चिंताजनक है। बढ़ती महंगाई को देखते हुए छात्रों के लिए और अधिक राहत होनी चाहिए थी।
प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहीं सोनिया सैनी का कहना है कि सरकार ने अपने बजट में शिक्षा को अनदेखा किया है।
बजट में लॉजिस्टिक गलियारे के आसपास विश्वविद्यालयों टाउनशिप का विकास, उच्च शिक्षा एसटीईएम संस्थानों में महिला छात्रावास, चार टेलिस्कोप अवसंरचना सुविधाओं की स्थापना की बात कही है लेकिन जिस नीव पर शिक्षा की इमारत खड़ी होती है वो है शोध। शोध कार्य पर बजट में कुछ नहीं दिया। शिक्षा के क्षेत्र में सरकार को जीडीपी का 10 प्रतिशत व्यय करना ही चाहिए ।