मुजफ्फरनगर। मनचाहे स्थान पर कार्यालय बनाकर प्रत्याशी चुनावी भोंपू नहीं बजा सकेंगे। कार्यालय बनाने की अनुमति देने से पहले आरओ जांच पड़ताल करेगा।
अस्पताल और बूथ से 200 मीटर की दूरी पर ही कार्यालय बनाने की अनुमति मिलेगी। इतना ही नहीं, कार्यालय में बैठने वालों के नाम और बैठक करने की अनुमति लेनी होगी।
प्रशासन पल पल की गतिविधियों को कैमरे में कैद कराएगा। जनपद में मंगलवार से चुनावी ताल ठोकी जाएगी। मैदान में उतरने वाले महारथी क्षेत्रों में चुनावी मंत्रणा को दफ्तर सजाएंगे, लेकिन इस बार यह आसान नहीं है।
मनचाहे स्थान पर तंबू गाढ़ कर चुनावी सभा चलाने की अनुमति नहीं दी जाएगी। क्षेत्र और स्थिति का जायजा लेने के बाद ही प्रशासन चुनावी दफ्तर खोलने की अनुमति देगा।
खासतौर पर अस्पताल (सरकारी-गैर सरकारी) तथा बूथों के निकट चुनावी भोंपू नहीं बजेगा। अस्पताल और बूथों से करीब 200 मीटर की दूरी पर दफ्तर खोला जा सकता है। दफ्तर खोलने से पहले रिटर्निंग ऑफिसर की जांच रिपोर्ट लगेगी। साथ ही कार्यालय पर आचार संहिता के दायरे में आने वाली गतिविधियां नहीं होंगी।