मोरना। स्वामी ओमानंद महाराज ने कहा कि भागवत आत्म परिष्कार करने का सर्वोत्तम साधन है। भागवत का सान्निध्य मानव जीवन को परिष्कृत कर आत्म कल्याण का मार्ग प्रशस्त करता है। भागवत निर्भय, निष्पक्ष और निःस्वार्थ भाव सिखाती है ।
भागवत पीठ श्री शुकदेव आश्रम के डोंगरे जी भागवत भवन में इलाहाबाद उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति प्रकाश सिंह की ओर से आयोजित भागवत कथा का पीठाधीस्वर स्वामी ओमानंद महाराज ने दीप प्रज्ज्वलन कर शुभारंभ किया। उन्होंने कहा कि भागवत इन गुणों को प्राप्त करने का आधार है। भागवत मनुष्य जीवन में सद्गुणों तथा सद् विचारों का निर्माण करती है और जीवन में कठिन परिस्थितियों पर विजय प्राप्त करने की शक्ति प्रदान करती है। इससे पूर्व स्वामी ओमानन्द ने भागवत पोथी का पूजन कर बरसाना धाम से पधारे कथा व्यास महेश चन्द्र शास्त्री को तिलक, माला, शाल पहनाकर सम्मानित किया। न्यायमूर्ति प्रकाश सिंह को माँ दुर्गा की प्रतिमा, शाल, शुकतीर्थ साहित्य भेंट किया। उनकी माता शिमला सिंह एवं परिवार को सम्मानित किया गया। विवेक शुक्ला, ट्रस्टी ओमदत्त देव, कथा व्यास अचल कृष्ण शास्त्री, आचार्य सुमन, आचार्य आशीष मौजूद रहे।