मोरना। पीठाधीश्वर स्वामी ओमानंद महाराज ने कहा कि भागवत मनुष्य के उत्थान के लिए भक्ति, ज्ञान और वैराग्य का मार्ग प्रशस्त करती है। भागवत भगवद् प्राप्ति का सबसे श्रेष्ठ उपाय है।
शुकतीर्थ के भागवत पीठ श्री शुकदेव आश्रम स्थित डोंगरे जी भागवत भवन में पुणे से पधारे तीर्थाटन परिवार के भक्तों की ओर से श्रीमद्भागवत कथा शुरू हुई। स्वामी ओमानंद महाराज ने कहा कि भागवत से मानव जीवन के चारों अस्तित्व शरीर, मन, बुद्धि और आत्मा का पोषण होता है। बिना भागवत के भारत को समझा नहीं जा सकता। भागवत भारतीय संस्कृति सभ्यता और इतिहास की साक्षी है। भागवत भारत की आत्मा और मानसिकता को सींचती है। संसार में सब कुछ प्राप्त किया जा सकता है परंतु मोक्ष प्राप्त करना अर्थात स्वयं को जानना बहुत कठिन है। इसका स्रोत भागवत है। भागवत आत्मज्ञान तथा जीवन उपयोगी ज्ञान का आधार है। इससे पूर्व भागवत पोथी पूजन कर व्यासपीठ पर कथाव्यास विद्या वाचस्पति डॉ. चारुदत्त बूबा गोविंद स्वामी को सम्मानित किया। कथा संयोजक प्रद्युम्न पेशवे, दीपक मिश्रा, आचार्य युवराज, ठाकुर प्रसाद, मनोज यादव मौजूद रहे।