मुजफ्फरनगर। वर्ष 2004...गांव बसेड़ा। कानपुर से कबड्डी का स्वर्ण पदक जीतकर लौटी प्राइमरी स्कूल की टीम का स्वागत समारोह। फूलों की बारिश और ढोल के साथ गांव में जुलूस। अपने चबूतरे पर खड़े तीन साल के अर्जुन देशवाल ने यहीं से कबड्डी का पहला ख्वाब देखा। उम्र कम थी लेकिन उनके जुनून को कोई नहीं रोक पाया। जापान के आइची नागोया में परचम लहराने वाली कबड्डी टीम में अर्जुन ने तिरंगा लहराकर खुद को साबित कर दिखाया।
एशियाड के स्वर्ण पदक की खुशी बसेड़ा तक छाई है। पुरानी यादें और बातें खूब हुई। अर्जुन के कोच पुरकाजी के प्राथमिक विद्यालय मलकपुरा में कार्यरत शिक्षामित्र धर्मेंद्र देशवाल बताते हैं कि 1999 से प्राइमरी स्कूल बसेड़ा नंबर-1 में कबड्डी का मैदान है। यहां से निकले विजय कल्ब के खिलाड़ियों ने पिछले 27 साल में जिले का नाम रोशन किया है।
अर्जुन का जिक्र छिड़ने पर कहते हैं कि 2004 में कानपुर से प्राइमरी स्कूल के बच्चों की टीम गोल्ड जीतकर लौटी, यहीं से अर्जुन कबड्डी की तरफ आकर्षित हुआ। 2005-06 में उसने खेलना शुरू किया। प्राथमिक विद्यालय बसेड़ा नंबर-1, हैरिटेज पब्लिक स्कूल और जनता जनार्दन स्कूल की टीम से खेलकर प्रतिभा दिखाई।
बचपन से ही वह शानदार रेडर रहे हैं। परिवार के साथ पूरे गांव ने हौसला बढ़ाया। उसके खेल की सराहना की गई और वह कामयाब होता चला गया।
कबड्डी प्रीमियर लीग के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी रह चुके हैं। यह उनका दूसरा एशियाड पदक है। 2022 में चीन के हांगझोउ की विजेता टीम का हिस्सा रहे। यूपी का लक्ष्मण पुरस्कार मिल चुका है।
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पीएसी मुरादाबाद में है तैनाती
अर्जुन देशवाल को खेल कोटे से डीएसपी बनाया गया था। वर्तमान में उनकी तैनाती मुरादाबाद में है। यहीं से वह पुलिस और सर्विसेज की टीमों के लिए खेलते हैं। प्रो-कबड्डी लीग में तमिल टीम का हिस्सा रहे। इनसेट ऐसा है स्वर्ण पदक विजेता परिवार खिलाड़ी के परिवार में पिता चरण सिंह, मां सीमा देवी, भाई आर्यन और पत्नी नेहा चौधरी हैं।
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बसेड़ा में जीत से छाई खुशी
छपार। जापान में भारत ने कबड्डी के फाइनल में ईरान को छह अंकों से हराकर स्वर्ण पदक जीत लिया। खुशी में अर्जुन देशवाल के मकान पर मनाते हुए मिठाई बांटी गई। उनके भाई आर्यन देशवाल ने बताया कि मैच देखने का इंतजाम किया गया था। इस मौके पर योगेंद्र कुमार, सुनील कुमार, हिमांशु, वासु, टीनू देशवाल, जितेंद्र, महिपाल सिंह, जोराबर सिंह, पीटीआई विपिन त्यागी और राहुल गर्ग आदि मौजूद रहे। संवाद
साल 2005 में बसेड़ा गांव में आयोजित समारोह में अर्जुन को पुरस्कृत करते अतिथि : फाइल फोटो