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वीरता का इतिहास लिख रहीं बेटियां : लेफ्टिनेंट भाग्यश्री

Mon, 18 Mar 2019 12:04 AM IST
Deepak Kausik अमर उजाला ब्यूरो/ मुजफ्फरनगर
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अपराजिता अभियान के अंतर्गत महिलाओं के साथ लेफ्टिनेंट भाग्यश्री। - फोटो : अमर उजाला
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अमर उजाला की प्रेरक पहल अपराजिता : 100 मिलियन स्माइल्स अभियान के तहत आर्य समाज गांधी कालोनी महिला मंडल द्वारा आयोजित सांस्कृतिक सभा में भारतीय सेना के शौर्य, त्याग और बलिदान को राष्ट्र का गौरव बताया। लेफ्टिनेंट भाग्यश्री ने कहा कि देश की आन, बान और शान में बेटियां भी दमखम के साथ इंडियन आर्मी में वीरता का इतिहास लिख रही है।
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गांधी कालोनी स्थित आर्य समाज भवन के सभागार में रविवार को अपराजिता कार्यक्रम श्रृंखला के अंतर्गत बुजुर्ग और युवा महिलाओं ने सहभागिता की। शुभारंभ निधि, अंकिता जैन, सुमन, स्वस्ति, भूमि, नीलेश व विशेष मिश्रा के सामूहिक गीत मंजिल तेरे कदम चूमेगी, आज नहीं तो कल, से हुआ। मुख्य अतिथि लेफ्टिनेंट भाग्यश्री का महिला आर्य समाज की अध्यक्षा उषा पटपटिया, नीरज राणा, अंजू छाबड़ा, प्रमिला गिरधर ने अभिनंदन किया। विदूषी संगीता आर्य ने दहेज प्रथा, घरेलू हिंसा, बाल विवाह और छेड़छाड़ जैसी सामाजिक बुराइयों के खिलाफ कविता से समाज को जागरूक किया।

चेन्नई की ऑफिसर ट्रेनिंग अकादमी से पासिंग आउट परेड के बाद पहली बार अपने घर आई लेफ्टिनेंट भाग्यश्री ने कहा कि महिला हिंसा के खिलाफ अपराजिता अभियान ने आधी आबादी को हौसला और नई ऊर्जा दी है। अन्याय, शोषण  के विरुद्ध महिलाएं संघर्ष का जज्बा रखे। सत्य की जीत अवश्य होती है। अपने पति कर्नल विश्वास कुमार के निधन के बाद उन्होंने उनकी वर्दी पहनने का संकल्प लिया, जिसके लिए ससुर सूबेदार विरेंद्र कुमार और सास ओमवती देवी ने हर कदम पर प्रोत्साहित किया।
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सात वर्ष के बेटे विवान के मातृत्व की जिम्मेदारी भी थी। एसएसबी की परीक्षा क्वालीफाई की और भारतीय सेना की कठिन ट्रेनिंग की बाद लेफ्टिनेंट बनी। जीवन में चाहे कोई भी कठिन परिस्थिति आए, मगर आत्मविश्वास को बनाए रखें। बहू को बेटी माने, वह हर कदम पर साथ निभाएगी। चाहे जो भी दिक्कतें आएं, मगर बेटियां दृढ़ता से अपने लक्ष्य को हासिल करें। सूबेदार विरेंद्र कुमार ने कहा कि जैसे बेटियों की प्रतिभा पर गर्व होता है, वैसे ही बहुओं की योग्यता, क्षमता और समर्पण का सम्मान कर उन्हें प्रोत्साहित करें। उमा भाटिया, मंजू कंसल, ओमवती, नंदनी आर्या ने विचार रखे। संचालन संगीता आर्या ने किया।

मतदान का किया वादा
मुजफ्फरनगर। सांस्कृतिक सभा में आर्य समाज और भारतीय योग संस्थान से जुड़ी साधिकाओं ने अपराजिता के संकल्प पत्र भरे। लोकसभा चुनाव में मतदान करने का सभी ने वादा किया। प्रधानाचार्या इंदू भल्ला ने कहा दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के लिए महिलाएं उत्साह से अपने मताधिकार का प्रयोग करें।

आचार्य ने किया लेफ्टिनेंट का अभिनंदन
मुजफ्फरनगर। वैदिक संस्कार चेतना अभियान के संयोजक आचार्य गुरुदत्त आर्य ने कहा कि समाज में नारी का सम्मान बढ़ेगा, तभी राष्ट्र का सर्वांगीण विकास होगा। वेदों में माता निर्माता भवति: का महत्व ऋषियों ने बताया है। माता महापुरुषों और वीरों की जननी है। लेफ्टिनेंट भाग्यश्री और परिजनों को आचार्य ने श्रीमद्भागवत गीता और वैदिक साहित्य भेंट किया। गजेंद्र सिंह राणा और इंद्रपाल शास्त्री ने सत्यार्थ प्रकाश प्रदान किया। विजयपाल सिंह, आचार्य दयाचंद, राम सिंह धीमान, सत्यवीर मलिक, भूपेंद्र सिंह आदि मौजूद रहे।

महिलाएं हो गईं भावुक
मुजफ्फरनगर। भारतीय सेना में बेटियां कैसे डॉक्टर, अफसर और पायलट बने जैसे सवालों की महिलाओं ने लेफ्टिनेंट भाग्यश्री से जानकारी ली। उनके संघर्ष की बातें सुन महिलाएं भावुक भी हो गईं। प्राची राठी, संतोष रानी, मिथलेश आर्या, मंजू त्यागी, नीलम कोहली आदि के सवालों के जवाब में भारतीय सेना की सेवा को बेटियों के लिए देश भक्ति और करियर का सुनहरा अवसर बताया।

अपराजिता की मुहिम ने बीते पांच माह में जिले में महिलाओं को अन्याय और हिंसा के खिलाफ नया हौसला दिया है। समाज के हर मंच पर बेटियां अपनी बात निर्भीक होकर रखे। व्यस्त जीवन में महिलाएं  स्वास्थ्य की रक्षा के लिए योग अपनाएं - शरणजीत कौर, योग प्रशिक्षिका।

नारी गरिमा को अक्षुण्ण रखने और आत्म विश्वास की मुस्कान के लिए महिलाएं संकल्पित हो। जीवन के हर क्षेत्र में नारी ने नए आयाम स्थापित किए हैं। शोषण और उत्पीड़न के खिलाफ चुप्पी तोड़े, ताकि नए भारत का निर्माण हो - साक्षी चुघ, नगर पालिका सदस्य।

उच्च शिक्षा के साथ वैदिक संस्कृति और संस्कारों के प्रति बेटियां जागरूक बनें। अंध विश्वास, पाखंड और अन्य कुरीतियों की वजह से देश में अभी भी बड़े स्तर पर महिलाएं प्रताड़ित होती हैं। साहस से आगे बढ़े कोई भी अड़चन कामयाबी से डिगा नहीं सकती - ऋषिका राणा, शिक्षिका।

सामाजिक, सांस्कृतिक, धार्मिक, प्रशासनिक और व्यावसायिक क्षेत्र में बेटियों ने अपनी प्रतिभा की धाक जमाई है। भेदभाव को छोड़े, बेटियों को स्वावलंबी और नेतृत्व की क्षमता के योग्य बनाए - वीनू तोमर, बैंक कर्मी।
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