लखनऊ तक दबाई गई अंजू की आवाज
चेयरपर्सन अंजू अग्रवाल और राज्य मंत्री कपिलदेव अग्रवाल के बीच सियासी खींचतान जग जाहिर है। वर्चस्व की जंग में लखनऊ तक अंजू अग्रवाल को राहत नहीं मिली। यही वजह है कि उन्हें इस्तीफे का एलान करना पड़ा।
शहर विधायक और प्रदेश सरकार में राज्यमंत्री कपिल देव अग्रवाल के खास समझे जाने वाले दो सभासदों की शिकायत पर ही चेयरपर्सन के खिलाफ कार्रवाई हुई है। जिले से लकर लखनऊ तक कांग्रेस से भाजपाई बनी अंजू अग्रवाल की पीड़ा किसी ने नहीं सुनी। अपनी ही पार्टी में उन्होंने अपने आपको बेबस पाया। लेड़ी सिंघम कही जाने वाली भाजपा की महिला चेयरपर्सन इतनी हताश, निराश और असहाय हो गई है कि उन्हें त्यागपत्र देने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।
हाईकोर्ट के आदेश के बाद शासन ने प्रशासन से जांच रिपोर्ट मांगी थी। प्रशासन ने जो रिपोर्ट भेजी है, उसके बाद चेयरपर्सन के वित्तीय के साथ प्रशासनिक अधिकार भी छीने जाने की तैयारी है। इससे पहले शासन कार्रवाई करे चेयरपर्सन ने त्यागपत्र देने की योजना बनाई है। सिस्टम के सामने उनके सभी प्रयास दम तोड़ते नजर आ रहे हैं। त्यागपत्र देने के अलावा अब उनके पास कोई चारा भी नहीं है।
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सभासदों ने इस्तीफा देने से रोका
पालिका में बैठक के दौरान सभासदों ने चेयरपर्सन को इस्तीफा देने से भी रोका, लेकिन उन्होंने एलान कर दिया है। हालांकि लिखित में अभी तक कहीं कोई प्रक्रिया नहीं अपनाई गई है।