अखिल भारतीय कवि सम्मेलन में देश प्रेम की कविताओं ने श्रोताओं में जोश भर दिया। हास्य कवियों ने गुदगुदाया तो गीतकार प्रेम के मर्म को झकझोर गए। कवि सम्मेलन में कवियों ने अपनी कविताओं के माध्यम से दर्शकों को बांधे रखा।
पूर्व केंद्रीय राज्यमंत्री एवं सांसद डॉ संजीव बालियान और शहर विधायक कपिलदेव अग्रवाल ने दीप प्रज्वलित कर कवि सम्मेलन का शुभारंभ किया। कवि सम्मेलन की अध्यक्षता करते हुए कवि माहेश्वर तिवारी ने पढ़ा- एक तुम्हारा होना क्या से क्या कर देता है। बेजुबान छत दीवारों को घर कर देता है। मीरा शलभ ने कुछ इस तरह झकझोरा- रेत पर चलना नीयत सी हो गई। पांव पानी पर पड़े तो जल गए।
गीतकार राजेंद्र राजन ने पढ़ा- मैं लिपट कर तुम्हें स्वप्न के गांव की, एक नदी में नहाता रहा रात भर। लखनऊ से आए गीतकार डॉ सुरेश ने कवियों की जिंदगी पर काव्य पाठ कर दिया- हम तो ठहरे यार बंजारे, इस नगर है उस नगर है, पांव में बांधे सफर हैं थके हारे, नींद के मारे। हम तो ठहरे यार बंजारे। देश में हास्य के प्रमुख हस्ताक्षर प्रवीण शुक्ला ने पढ़ा हम कबीरा की साखी है, तुलसी वाणी है। सूर नरोत्तम भूषण की अनमोल निशानी हैं। गंगा-जमुना सरस्वती मिलती है जिस तट पर , उस प्रयाग के संगम का हम निर्मल पानी हैं। उन्होंने पढा- जल गया घर मेरा बचा ही क्या, बच गया मैं तो फिर जला ही क्या।
झांसी से आये पूर्व मंत्री और कवि रविंद्र शुक्ल ने पढा- सोमरस तो नाली में भी है, बस दृष्टि सुअर की चाहिए। हास्य कवि मक्खन मुरादाबादी ने अहिल्या प्रसंग पर नए तरीके से कविता पढ़ी- ठहरो राम अभी वहीं पर ठहरों तुम, मुझ अभागिन को पत्थर की एक शिला ही रहने दो। डॉ अनु सपन ने पढ़ा- इतनी नफरत दिलों में न पाला करो, जिंदगी घुट-घुट कर मर जाएगी। वीर रस के कवि कमलेश शर्मा ने राम हुए हैं कितने और प्रमाण दे, कविता सुनाकर वाहवाही लूटी।
अमन अक्षर इंदौर ने श्रृंगार रस के गीत सुनाये- ये तुम्हारी गली का सरल रास्ता, हमारे लिए कठिन रास्ता है। चंद कदमों की दूरी के इस फेर में, वक्त ने मिलों घुमाया हमें। छतरपुर से आये अभिराम पाठक ने सरदार भगत सिंह को 12 घंटे पहले फांसी देने का प्रसंग अपनी कविता के माध्यम से उठाकर सभी को भाव विभोर कर दिया।
आगरा से आई डॉ रुचि चतुर्वेदी ने पढ़ा- मैं बिंदु से रेखा बनाने चली हूं, मैं सागर से नदियां मिलाने चली हूं। मेरे नैन बातें करने लगे है, तेरे पियारे नैनो की जादूगरी है। डॉ अर्जुन सिसौदिया ने वीर रस की कविता सुनाकर पूरे वातावरण को देशभक्तिमय कर दिया। सर्जिकल स्ट्राइक पर सवाल उठाने वालों पर सीधा हमला किया।
वाराणसी से आए अनिल चौबे और कानपुर से आए हेमंत पांडेय ने हास्य कविताएं सुनाकर सभी को लोटपोट कर दिया। हुक्का बिजनौरी और नेमपाल प्रजापति के हास्य व्यंग का अंदाज भी श्रोताओं को भाया। सुनील उत्सव, सौरभ कांत शर्मा, रुपा चौधरी और मोहित संगम ने भी काव्य पाठ कर तालियां बटोरी। संचालन कवि डॉ प्रवीण शुक्ल ने किया। सिटी मजिस्ट्रेट अमित सिंह, स्टील एसोसिएशन के सतीश गोयल, प्रदीप जैन आदि मौजूद रहे।