फोटो अमर उजाला ब्यूरो
मुजफ्फरनगर। विधानसभा चुनाव 2027 के लिए सियासी उठा-पटक जारी है। आसपा नेता एवं पूर्व सांसद अमीर आलम खान ने 27 साल बाद फिर चुनाव लड़ने का एलान किया। एसआईआर ( विशेष प्रगाढ़ पुनरीक्षण ) के बाद मतदाताओं के समीकरण में हुए बदलाव का हवाला देते हुए सदर सीट से दावेदारी की। वर्ष 1969 में सईद मुर्तजा के बाद मुस्लिम विधायक नहीं बन सका।
पूर्व सांसद ने वर्ष 1999 में कैराना लोकसभा सीट पर आखिरी चुनाव लड़ा और भाजपा नेता उपथल सेना अध्यक्ष निरंजन सिंह मलिक को हराकर जीत दर्ज की थी। वर्ष 2006 में वह राज्यसभा सदस्य रहे। नए परिसीमन के बाद सपा के टिकट पर वर्ष 2012 में उनके बेटे नवाजिश आलम विधायक चुने गए थे।
आलम परिवार की यही आखिरी जीत थी। लोकसभा चुनाव 2024 में कैराना सीट से रालोद के टिकट की दावेदारी की लेकिन सपा-रालोद गठबंधन में इकरा हसन को प्राथमिकता दी। आलम परिवार अब वापस मुजफ्फरनगर की सियासत में वापसी करेगा।
फेसबुक पेज के जरिये अमीर आलम ने मुजफ्फरनगर सीट से चुनाव लड़ने का एलान किया। उनके बेटे पूर्व विधायक ने पुष्टि की। पूर्व सांसद ने समर्थकों से कहा कि एसआईआर के बाद सीट का गणित बदल गया है। अब वह खुद चुनाव लड़ने के लिए उतरेंगे। उनके एलान के बाद दिनभर सियासी हलचल रही।
मुस्लिमों के लिए चक्रव्यूह से कम नहीं सदर सीट
सदर विधानसभा सीट पर एसआईआर में 59 हजार 839 वोट कम हो गए हैं। वर्तमान में तीन लाख 11 हजार 887 मतदाता हैं। भाजपा के वर्चस्व वाली सीट दूसरे दलों के लिए मुश्किलें खड़ी करती रही है। बीकेडी के टिकट पर सईद मुर्तजा ने 1969 में 21665 वोट हासिल कर कांग्रेस के केशव गुप्त को हरा दिया था। कांग्रेस प्रत्याशी को 18596 वोट मिले थे। पिछले 57 साल में कोई मुस्लिम विधायक नहीं बना। यही नहीं मुर्तजा से पहले भी सदर सीट से मुस्लिम प्रत्याशी को जीत नहीं मिली है।
मुजफ्फरनगर दंगे के बाद पटरी से उतर गई आलम एक्सप्रेस
मूलरूप से शामली के गढ़ीपुख्ता के रहने वाले पूर्व सांसद अमीर आलम का परिवार पिछले चार दशक से सियासत में है। अमीर आलम वर्ष 1985 में थानाभवन से विधायक चुने गए थे। जनता दल के टिकट पर 1989 में मोरना और 1996 में थानाभवन से तीसरी बार विधायक बने। कैराना लोकसभा सीट से 1999 में सांसद और 2006 में वह राज्यसभा सदस्य भी रहे। प्रदेश सरकार में वह मंत्री और वक्फ बोर्ड के चेयरमैन भी रहे हैं। उनके बेटे नवाजिश ने 2012 में बुढ़ाना से सपा के टिकट पर जीत दर्ज की। 2017 में बसपा के टिकट पर मीरापुर से चुनाव लड़े लेकिन हार गए। साल 2019 के लोकसभा, 2022 के विधानसभा और फिर 2024 के लोकसभा चुनाव में मुजफ्फरनगर और शामली की अलग-अलग सीटों से टिकट के लिए दावा भी किया लेकिन रालोद ने उन्हें चुनाव नहीं लड़ाया था। पूर्व सांसद ने कई बार सार्वजनिक तौर पर टिकट नहीं दिए जाने पर नाराजगी भी जताई। मीरापुर विधानसभा के उपचुनाव में भी नवाजिश को टिकट दिए जाने का दावा किया लेकिन एन वक्त पर भाजपा की मिथलेश पाल को रालोद का टिकट मिला और जीत हासिल हुई।