मिलावटी दूध का आरोपी 23 साल बाद बरी
मुजफ्फरनगर। दूध में मिलावट के मामले में अदालत ने साक्ष्य के अभाव में आरोपी को 23 साल बाद बरी कर दिया। अभियोजन पक्ष मौके के गवाह खाद्य निरीक्षक को अदालत में कोर्ट में पेश कराने में नाकाम रहा।
मेघाखेड़ी के खाद्य निरीक्षक मदन सिंह ने 27 फरवरी 1997 को शाहपुर के गोयला मोड़ में गाय-भैंस के दूध से भरी गाड़ी रुकवा कर सैंपलिंग की थी। दूध के तीन नमूने लेकर जन विश्लेषक प्रयोगशाला लखनऊ को परीक्षण के लिए भेज दिया गया था। चार अप्रैल 1997 को रिपोर्ट अपमिश्रित दूध की मिली। आरोपी मुबारिकपुर निवासी वकील के विरुद्ध अपमिश्रण की धाराओं में परिवाद दाखिल किया गया था।
मुकदमे की सुनवाई एसीजेएम-1 प्रशांत कुमार की कोर्ट में हुई। सुनवाई के दौरान वादी खाद्य निरीक्षक मदन सिंह ने 28 जनवरी 1999 को कोर्ट में गवाही दी। लेकिन अभियोजन 23 साल के दौरान मौके के गवाह खाद्य निरीक्षक पुरकाजी एमवी शर्मा की गवाही कोर्ट में नहीं करा सका। दोनों पक्षों की सुनवाई के बाद कोर्ट ने साक्ष्य के अभाव में आरोपी को बरी कर दिया। अभियोजन अधिकारी रामअवतार सिंह ने बताया कि उच्च अदालत में अपील की जाएगी।