अस्थायी जेल में तैयार हुई फरारी की साजिश
मुजफ्फरनगर। जिला कारागार में बंद हत्यारोपी कवाल की अस्थायी जेल में साजिश कर आसानी से जेल अफसरों को चकमा देकर फरार हो गया। किसी को इसकी भनक तक नहीं लगी। फरारी के 17 दिन बाद हत्यारोपी के साथी ने जेल में हुई शनाख्त परेड में उसकी फरारी का खुलासा नहीं किया होता तो जेल प्रशासन न जाने कब तक गफलत में ही रहता।
जानसठ क्षेत्र के नयागांव फैजाबाद निवासी शिक्षक राधेश्याम की हत्या के मामले में पुलिस ने दस जून को गाजियाबाद के मुरादनगर थाना क्षेत्र के गांव जैतपुरा निवासी अजीत उर्फ अजय, अंकित उर्फ मोनू और एक महिला को गिरफ्तार कर अस्थायी जेल कवाल भेजा था। इसके अगले दिन 11 जून को खतौली पुलिस ने शहर के मोहल्ला ब्रह्मपुरी निवासी विकास को शांतिभंग में अस्थायी जेल कवाल भेजा था। अस्थायी जेल में ही विकास व अजीत उर्फ अजय के बीच साठगांठ हुई, जिसके बाद दोनों ने एक-दूसरे से अपनी पहचान बदल ली। अस्थायी जेल से जिला कारागार में 16 जून को स्थानांतरित होते समय अजीत, विकास के नाम से और विकास, अजीत के नाम से दाखिल हुआ। इसके बाद 21 जून को खतौली एसडीएम ने विकास को शांतिभंग के मामले में जमानत दी, तो उसके नाम पर जेल में बंद हत्यारोपी अजीत उर्फ अजय जेलकर्मियों को चकमा देकर रिहा होकर रफूचक्कर हो गया। 21 जून की रात को ही जेल में बंदियों की शनाख्त परेड हुई तो हत्यारोपी के साथी मोनू उर्फ अंकित ने उसे गायब देख जेल अफसरों को इसकी जानकारी दी। इसके बाद पुलिस ने रिहा हुए बंदियों की शनाख्त कराई तो मोनू उर्फ अंकित ने शांतिभंग में रिहा हुए विकास नामक युवक की पहचान हत्यारोपी के रूप में की। इसके बाद जेल अफसरों ने हत्यारोपी अजीत को बुलाकर उसकी पहचान कराई तो उसकी शनाख्त ब्रह्मपुरी निवासी विकास के रूप में हुई, जिसके बाद विकास ने इस पूरी साजिश का खुलासा किया। इसके बाद से ही जेल अफसर गुपचुप तरीके से हत्यारोपी की तलाश करते रहे, लेकिन उसका सुराग न लगने पर सात जुलाई को अजीत व विकास के खिलाफ नई मंडी थाने में मुकदमा दर्ज कराया गया।
जेल में बंद विकास के कोर्ट से लिए गए बी-वारंट
मुजफ्फरनगर। फर्जीवाड़ा कर जेल से फरार हुए हत्यारोपी के मामले में नई मंडी कोतवाली पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज करने के साथ ही जांच शुरू कर दी है। सीओ मंडी हिमांशु गौरव ने बताया कि हत्यारोपी से साठगांठ कर अपने स्थान पर उसे रिहा कराने वाले ब्रह्मपुरी निवासी विकास के कोर्ट से बी-वारंट ले लिए गए हैं, ताकि वह किसी तरह से रिहा न हो सके। अब उसे रिमांड पर लेकर पूछताछ कर पूरे मामले की जांच की जाएगी। वहीं, फरार हत्यारोपी की तलाश में टीम का गठन किया गया है, जिसे गाजियाबाद भेजा गया है।