मुजफ्फरनगर। वित्त मंत्री द्वारा पेश किए गए बजट को लेकर अर्थशास्त्री, सीए और आयकर अधिवक्ता ने मिली जुली प्रतिक्रिया दी है। बजट को विकसित भारत का आधार बताया जा रहा है। कृषि, रोजगार, कौशल विकास के लिए बजट को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
डीएवी कॉलेज की अर्थशास्त्र की विभागाध्यक्ष डॉ सुषमा सैनी का कहना है कि वित्त मंत्री निर्मला सीता रमण ने बजट 2024-25 में विकसित भारत के लिए नौ सूत्रीय रोडमेप प्रस्तुत किया है। रोजगार सृजन और कौशल विकास पर जोर दिया गया है। देश के विकास के लिए 41.21 लाख करोड़ खर्च किए जाएंगे। 20 लाख युवाओं को कौशल प्रशिक्षण दिया जाएगा। नई इंटर्नशिप योजना का एलान किया गया है। इसमें एक करोड युवाओं को लाभ होगा। सोने, चांदी आदि पर सीमा शुल्क में छह प्रतिशत कटौती कर दी है, इससे इनके दाम कम होगे। बजट में महिलाओं, युवाओं और विद्यार्थियों का विशेष ध्यान रखा गया है। यह बजट 2047 के विकसित भारत की ओर इंगित करता है।
सीए कुनाल सिंघल का कहना है कि आम बजट में कृषि के लिए डेढ़ लाख करोड़ से अधिक का प्रावधान है। इससे हमारा कृषि सेक्टर आगे बढ़ेगा। कौशल विकास योजना के तहत नौजवानों के लिए रोजगार की व्यवस्था की गई है। मुद्रा लोन को 10 लाख से बढ़ाकर 20 लाख करने का काम किया गया है। उच्च शिक्षा के लिए 10 लाख तक का लोन हम ले सकते हैं इससे हमारे नौजवानों के लिए उच्च शिक्षा लेने का रास्ता खुलेगा। तीन करोड़ नए आवास, महिलाओं के लिए नई रोजगार की योजनाएं, नए हाईवे नए मेडिकल कॉलेज नए एयरपोर्ट की योजना है।
वरिष्ठ आयकर अधिवक्ता मशकूर अहमद का कहना है कि आयकर स्लेब में आम जनता को जो उम्मीद थी वह पूरी नहीं हो पाई है। बावजूद इसके बजट सही रहा है। बजट में देश की आधार संरचना पर जोर दिया गया है। आयकर की दृष्टि से कुछ अधिक बदलाव नहीं हुए है। कौशल विकास मिशन, रोजगार, कृषि पर अधिक जोर दिया गया है।
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- रणवीर सैनी