शामली। भाकियू के नेतृत्व में किसानों ने गन्ने का वाजिब दाम बढ़ाने की मांग को लेकर जिले में जबरदस्त चक्का जाम कर अपनी नाराजगी का इजहार किया। जिले के पांच स्थानों पर किसानों ने सूबे की सरकार के खिलाफ धरना-प्रदर्शन किया और गन्ने की होली जलाई। शामली के गुरुद्वारा तिराहे और सिंभालका गांव में भाकियू कार्यकर्ताओं ने प्रदेश सरकार का पुतला फूंका। प्रदर्शनकारियों ने मांगें पूरी नहीं होने पर आंदोलन को और तेज करने की चेतावनी दी है।
शनिवार को भाकियू नेता विनोद निर्वाल ,कुलदीप पंवार के नेतृत्व में सैकड़ों किसान सुबह 10 बजे गुरुद्वारा तिराहे पर एकत्र हुए। इसके बाद प्रदर्शनकारियों ने हाईवे पर ट्रैक्टर-ट्रॉलियां अड़ाकर जाम लगा दिया। पंडित रामदत्त शर्मा और मास्टर श्याम सिंह सिंभालका की अध्यक्षता में हुई सभा में सूबे की सपा सरकार के खिलाफ आरपार की लड़ाई शुरू करने का ऐलान किया गया। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि यह पहली सरकार है, जिसने लगातार दो साल तक गन्ना मूल्य नहीं बढ़ाया। किसानों ने कहा कि सपा सरकार के राज में ही किसान गन्ना भुगतान के लिए सबसे ज्यादा परेशान हुआ है। वेस्ट यूपी की कई मिलों ने पिछले सत्र का भुगतान अब तक नहीं किया। 350 रुपये प्रति क्विंटल से कम पर गन्ना मूल्य मंजूर नहीं होगा। धरनास्थल पर ओमवीर पटवारी, मदन ,जयवीर कुड़ाना, शीशपाल सिंह, पप्पू वाल्मीकि, दीपक शर्मा आदि मौजूद थे। सिंभालका गांव में भाकियू नेता राजबहादुर सिंह के नेतृत्व में किसानों ने शामली-मेरठ हाईवे जाम कर अपने गुस्से का इजहार किया। किसानों ने यहां भी गन्ने की होली जलाकर प्रदेश सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। सतवीर सिंह, बिजेंद्र ,शीशपाल, विक्रम ,रमेश और समय सिंह आदि मौजूद थे।
झिंझाना में भाकियू जिलाध्यक्ष प्रदीप चौधरी, प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य जावेद तोमर के नेतृत्व में भाकियू कार्यकर्ता और किसानों ने मेरठ-करनाल हाईवे जाम किया। बड़ौली में मेरठ-करनाल हाईवे पर ही अशोक कुमार केरटू के नेतृत्व में किसानों ने जाम लगाया। कांधला में भी किसानों ने धरना प्रदर्शन कर सरकार से गन्ने का दाम बढ़ाने की मांग की। किसानों ने कांधला-बुढ़ाना मार्ग पर जाम लगाकर यातायात बाधित कर दिया।
हाईकमान के निर्देश पर बनेगी रणनीति
शामली। भाकियू जिलाध्यक्ष प्रदीप चौधरी, मंडल सचिव विनोद निर्वाल ने बताया कि हाईकमान के निर्देश के अनुसार तीन घंटे चक्का जाम किया गया। जाम पूरी तरह सफल और शांतिपूर्ण रहा। किसानों ने आंदोलन के जरिये सरकार को चेताया है। हाईकमान के आदेश पर आगे की रणनीति बनाई जाएगी।