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- पुलिस की मौजूदगी में जौली नहर पर मारे गए लोग

Thu, 19 Sep 2013 05:37 AM IST
Muzaffar nagar
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मेरठ। मुजफ्फरनगर दंगों का सच अब पुलिस अधिकारी और कर्मचारी उगलने लगे हैं। एक टीवी चैनल के स्टिंग ऑपरेशन में जिस तरह अधिकारियों ने बेबाकी से बयान दिए उससे तय हो गया कि दंगा सुनियोजित था। जिसमें कई निर्दोष मारे गए और पुलिस आज तक दंगाइयों को छू तक नहीं पाई है।
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ड्यूटी पर लगे एसपी राम अभिलाष का ये कहना कि दंगा प्रतिक्रिया है। निर्दोष मारे गए, लेकिन दंगाइयों को आज तक छू नहीं पाए हैं। ये तो होना ही था। येे प्राकृतिक न्याय है। एक पक्ष के लोग भागकर इधर आ गए तो पीड़ित हो गए और दूसरे पक्ष के लोग भागकर खेतों में चले गए तो वे अपराधी हो गए।
दंगे केचश्मदीद भोपा थाने के हेड कांस्टेबल ब्रह्म सिंह के अनुसार हजारों लोगों ने पंचायत से लौट रहे ग्रामीणों को घेरकर हमला बोला। उस दौरान मौके पर पीएसी और पुलिस बल मौजूद था। मतलब साफ है कि पूरी घटना पुलिस फोर्स की मौजूदगी में हुई, लेकिन पुलिस मूकदर्शक बनी रही।
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अमर उजाला ने तीन दिन पहले प्रमुखता से प्रकाशित किया कि जौली नहर के पास दंगा पुलिस फोर्स की मौजूदगी में हुआ। वहीं, अधिकारी इससे इनकार करते रहे। अब मातहतों के मुंह से सच्चाई सामने आ रही है। 30 और 31 अगस्त को हुई पंचायतों पर मुजफ्फरनगर कोतवाल सतपाल सिंह का बयान भी गौरतलब है। उनके अनुसार जिले में धारा 144 लगी थी। सभा की अनुमति नहीं थी। ऐसे में लाउडस्पीकर पर भाषण प्रतिबंधित था। इसके बावजूद सब कुछ हुआ। उनके अनुसार इसे तो सिटी मजिस्ट्रेट को रुकवाना चाहिए था। 30 अगस्त को हुई पंचायत में बसपा सांसद कादिर राणा सहित सभी पर मुकदमा हुआ। अब तक गिरफ्तार सिर्फ सुल्तान हुसैन को ही किया गया। इंस्पेक्टर शाहपुर सत्यप्रताप सिंह के अनुसार 7 सितंबर को दो बार दंगा पुलिस की मौजूदगी में हुआ। ट्रैक्टर बाइक नहर में गिरा दिए और 6-7 लोगों को मार दिया था।
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