मुजफ्फरनगर, 12 मार्च
जिंदगी यूं भी जली, यूं भी जली मीलों तक!
चांदनी चार कदम, धूप चली मीलों तक!!
प्यार का गांव अजब गांव है जिसमें अक्सर!
खत्म होती ही नहीं दुख की गली मीलों तक!!
डॉ. कुंवर बेचैन की गजल की इन पंक्तियों में मुजफ्फरनगर के प्रेमी युगलों का दर्द बयां होता है। झूठी आन के लिए ‘अपने’ ही मौत बनकर सामने खड़े हो जाते हैं। बेटियों को कत्ल कर दिए जाने की रवायत सी हो गई है। लद्दावाला में अगर पुलिस समय से न पहुंची तो एक और युगल की जान चली गई होती। इससे पहले कई पन्ने मोहब्बत की राह पर चलने वाले प्रेम दीवानों के लहू से रंगे है।
केस एक :
सिखेड़ा थाना क्षेत्र के बिहारी गांव में 12 अगस्त 2012 को इरशाद उर्फ काला ने अपनी बहन शबनूर की गर्दन काटकर हत्या कर दी थी। हत्या करने के बाद गर्दन कटी बहन की लाश को आरोपी ने प्रेमी के घर के बाहर फेंक दिया था।
केस दो :
नई मंडी कोतवाली क्षेत्र की गांधी कॉलोनी में वर्ष 2012 में छोटे भाई ने बड़ी बहन को सिल-बट्टे से पीट-पीटकर मौत के घाट उतार दिया था।
केस तीन :
नगर कोतवाली क्षेत्र के खादरवाला निवासी शाईस्ता को मोहल्ले के एक युवक से प्यार करने की सजा मौत के रूप में मिली थी। भाई आसिफ ने उसके पेट में छुरी घोंप दी थी। गंभीर अवस्था में मेरठ रेफर किया गया, लेकिन आरोपी वहां भी पहुंच गया और अस्पताल में ही फिर से चाकू घोंपकर बहन को मौत के घाट उतार दिया।
केस चार :
चरथावल थाना क्षेत्र के सिलाजुड्डी में प्रेमी युगल को ही मौत के घाट उतार दिया गया था। दोनों की लाश दूसरी मंजिल पर बने कमरे से बरामद हुई थी।
केस पांच :
नगर कोतवाली क्षेत्र के खालापार निवासी नर्गिस को मोहब्बत करने की सजा में दिल-दहला देने वाली मौत मिली थी। सगे भाई ने खालापार में बीच चौराहे पर उसकी गर्दन कलम कर दी थी और खुद ही थाने पहुंच गया था।