मुजफ्फरनगर। साइंस स्ट्रीम की जिला टॉपर आंचल त्यागी ने केवल इसलिए बाहरवीं में हिंदी विषय भी लिया, ताकि मातृभाषा को मन की गहराई से पढ़ लिया जाए। एमजी पब्लिक स्कूल की मेधावी ने 490 अंक हासिल किए है, जिसमें हिंदी में उसके 95 मार्क्स है। कवि हरिवंश राय बच्चन की यह पंक्तियां फिर मूढ़ न क्या जग, जो इस पर भी सीखे/ मैं सीख रहा हूं, सीखा ज्ञान भुलाना गुनगुनाती हुई आंचल सीबीएसई 12वीं में मिली उड़ान से नए सपनों में आनंदित है, उल्लासित है। उसने हर दिन केवल चार घंटे की सेल्फ स्टडी की थी।
शहर के कृष्णापुरी की गली नंबर 2 में जिले की विज्ञान वर्ग की टॉपर आंचल त्यागी का आशियाना है। उनकी उपलब्धि बहुत बड़ी है और साइंस स्टूडेंट के लिए प्रेरक भी। पढ़ते-पढ़ते हिम्मत टूटने लगी थी, ऐसे में माता-पिता का प्रोत्साहन संजीवनी बना और शानदार कामयाबी मिली। अमर उजाला से खास बातचीत में उन्होंने अपने मन की बातें बेबाकी से साझा की। 490 अंकों से संतुष्ट हूं। गणित की तैयारी पिता पवन कुमार त्यागी ने कराई। वह शामली जिले के बाबरी स्थित जनता इंटर कालेज में मैथ्स प्रवक्ता है। गणित में 99 अंक का श्रेय डैडी को भी दूंगी। केमेस्ट्री में 99, अंग्रेजी में 100 और फिजिक्स में 97 अंक मिले है। फिजिक्स में जितेंद्र जिंदल सर का मार्गदर्शन काम आया। हिंदी पढ़ने में मन लगता है। साइंस सब्जेक्ट के साथ हिंदी को चुना, ताकि अपनी मातृभाषा को जान सकूं। कविताओं का शौक रहा है। रिटायर्ड हो चुकी शिक्षिका उषा गुप्ता कविताएं लिखती थी, उन्ही से प्रेरणा मिली। अब कवि हरिवंश राय बच्चन की मधुशाला पढ़ रही हूं। आंचल के मुताबिक दून वैली देवबंद में कक्षा पांच तक पढ़ाई की। फिर एमजी पब्लिक स्कूल में दाखिला लिया। हाईस्कूल में 10 सीजीपीए पाया और बाहरवीं में श्रेष्ठ करने का निरंतर लक्ष्य बनाए रखा।
जिले में सबसे अव्वल रहूंगी, ऐसा नहीं सोचा था। कभी क्लास नहीं छोड़ी। शिक्षकों से हर शंका का समाधान लिया। मां रीना त्यागी ने हमेशा मोटिवेशन किया। कहती थी, बस आप पढ़ाई पर फोकस रखे। मम्मी खुद अंग्रेजी में एमए पास है। अभिभावक यदि शिक्षित है, शिक्षण से जुड़े है, इसका फायदा मिलता है, मुझे भी मिला। साइंस स्ट्रीम के विद्यार्थी बोर्ड परीक्षा के साल अपने हौसले को दरकने न दें। कई बार लय टूटने लगती है, बस इसी परिस्थिति पर नियंत्रित रहे। कोचिंग का यह लाभ अवश्य है कि अलग-अलग स्कूलों के छात्र-छात्राओं के साथ विषयों पर चर्चा में जानकारी बढ़ जाती है। साइंस को छोड़ कर आगे राजनीति शास्त्र में बीए आनर्स करने के सवाल पर आंचल कहती है कि नए विषयों को पढ़ने की आत्म संतुष्टि अलग ही होती है।
पीएम मोदी से मिलने चाहती है आंचल
मुजफ्फरनगर। जिले की साइंस टॉपर आंचल को यदि मौका मिले तो वह देश के पीएम नरेंद्र मोदी से मिलना चाहती है। उनके भाषण के अंदाज और बेजोड़ हिंदी की वह कायल है। उनके पास मोबाइल नहीं है। टीवी खराब हो गया, पापा ने परीक्षा की वजह से ठीक ही नहीं कराया। बैडमिंटन खेलती है। पढ़ाई की थकान होती थी तो दोनों भाई उमंग और तेजस त्यागी के साथ हंसी-ठिठोली से फ्रेश हो जाती थी। उनके घूमने की पसंदीदा जगह उनका गांव शेरपुर, जड़ौदा पांडा है, जो जिला सहारनपुर में हैं। उसकी खास क्लास मित्र रोहना की अपूर्वा धीमान है, जिसने 91 प्रतिशत अंक पाये है। मूवी का शौक है। हाल ही में उसने नीरजा, निल बटे सन्नाटा और दि माउंटेनमैन मांझी फिल्में देखी है।
बेटियों को निर्भीक होकर आगे बढ़ने का मौका दें
मुजफ्फरनगर। साइंस की जिला टॉपर आंचल त्यागी ने अमर उजाला के अनूठे अभियान- अपराजिता : 100 मिलियन स्माइल्स की तारीफ की और महिला हिंसा के खिलाफ जागरूकता की मशाल बताया। उन्होंने कहा कि बेटियां भारतीय संस्कृति के आदर्शों, मूल्यों और परंपराओं के साथ परिश्रम, लगन एवं साहस की दास्तां रचने में जुटी है। मेरे पिता-माता ने मुझे पढ़ाई का बेहतरीन माहौल दिया। निर्भीक होकर आगे बढ़ने का हौसला दिया। दिल्ली विश्वविद्यालय से बीए करना है, फिर आईएएस बनना है। बेटियों को स्वावलंबी बनाए, घर को उन्नति मिलेगी और देश तथा समाज को दिशा। उन्होंने नारी गरिमा को अक्षुण्ण रखने और महिला शोषण, उत्पीड़न के खिलाफ आवाज बनने का संकल्प लिया। उनकी माता रीना त्यागी ने कहा कि नारी गरिमा के प्रति समाज के प्रत्येक व्यक्ति को जिम्मेदारी निभानी चाहिए। बेटियां देश की शान है, परिवार का स्वाभिमान है। आंचल ने हमे जो खुशी दी, शब्दों में कह नहीं सकते।