अमर उजाला ब्यूरो
देवबंद(सहारनपुर)। नोएडा पुलिस द्वारा कंपनियों को नोटिस जारी कर कर्मचारियों पर पार्क में नमाज पढ़ने की पाबंदी लगाए जाने पर देवबंदी उलमा ने सख्त नाराजगी का इजहार किया है। उलमा का कहना है कि ंहिंदुस्तान में ऐसा कोई कानून नहीं है जो इबादत करने से रोकता हो। दोहरे मापदंड अपनाकर वर्ग विशेष के अधिकारों का हनन किया जा रहा है।
फतवा ऑनलाइन के चेयरमैन मौलाना मुफ्ती अरशद फारुकी ने कहा कि हिंदुस्तान में रिवाज रहा है कि खास मौकों पर मस्जिदों में होने वाली नमाज के दौरान अगर जगह कम पड़ती हैं तो सड़क पर नमाज पढ़ने के लिए पुलिस प्रशासन इंतजाम करता है, लेकिन अगर कहीं इस प्रकार के अमल से लड़ाई झगड़े का खतरा हो और पुलिस प्रशासन रोकता है तो कारण पूछते हुए उनका सहयोग करना चाहिए। मगर बिना वजह पुलिस इबादत करने से रोकती है तो यह सरासर गलत है। उन्होंने कहा कि हिंदुस्तान वो मुल्क है जहां हिंदू समाज के लोग मुस्लिमों की इबादत के लिए व्यवस्था बनाते हैं और मुसलमान हिंदू भाईयों की पूजा पाठ के लिए इंतजाम करते हैं। ऐसे मुल्क में इस तरह की पाबंदी लगाना समझ से परे है और हिंदुस्तान में इस प्रकार की रुकावट के लिए कोई कानून ही नहीं है। मजलिस इत्तेहाद-ए-मिल्लत के प्रदेशाध्यक्ष मुफ्ती अहमद गौड़ का कहना है कि पुलिस प्रशासन सरकार के इशारे पर दोहरे मापदंड अपना रहा है। नमाज मस्जिदों में अदा होनी चाहिए इससे इंकार नहीं किया जा सकता, लेकिन नमाज एकता का प्रतीक है इसे भी झुठलाया नहीं जा सकता। पार्क में नमाज पढ़ने से रोका जाना यह सरकार का एक समुदाय के साथ सौतेला व्यवहार है, जबकि दूसरे धर्मों के विशेष आयोजनों के दौरान बाजारों से होकर निकालने वाले जुलूसों के चलते घंटों आवाजाही प्रभावित होती है और लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। इस पर कभी किसी ने ऐतराज नहीं उठाया। उन्होंने कहा कि सरकार सबकी है इसलिए सरकार की जिम्मेदारी बनती है कि वह सभी के लिए व्यवस्था कराए। मदरसा जामिया शेखुल हिंद के मोहतमिम मौलाना मुफ्ती असद कासमी का कहना है कि नमाज पढ़ने पर रोक लगाया जाना बेहद अफसोसनाक है। हिंदुस्तान में हर धर्म के लोग रहते हैं और उन्हें अपने मजहब के मुताबिक जिंदगी गुजारने और इबादत करना का पूरा अधिकार है। मुसलमान कोई बड़ा आयोजन कर घंटों इबादत नहीं करता बल्कि उसे नमाज अदा करने के लिए चंद मिनट लगते हैं। इसमें किसी को कोई परेशानी भी नहीं होती। नमाज पर पाबंदी लगाया जाना शर्मनाक है। नोएडा पुलिस को इस पर पुनर्विचार करना चाहिए।