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प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के भवन में चल रही सीएचसी

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चरथावल। चरथावल में बनी सीएचसी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) के भवन में चल रही है। यहां विशेषज्ञ चिकित्सकों का अभाव और माकूल स्वास्थ्य सेवाएं मुहैया नहीं हो पा रही हैं। जिस करण हादसे अथवा मारपीट की घटनाओं में घायलों के उपचार के लिए हायर सेंटर अथवा जिला चिकित्सालय रेफर कर दिया जाता है।
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करीब दो दशक पूर्व निवर्तमान भाजपा एमएलए रणधीर सिंह के प्रयास से शासन से चरथावल को सीएचसी निर्माण की मंजूरी मिली थी। इसकी इमारत बनने से पूर्व ही 30 जून वर्ष 2006 में निवर्तमान मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव ने नुमाइश कैंप में रैली के दौरान सीएचसी के शिलापट का लोकार्पण कर खन्नापूर्ति कर ली थी। 12 साल बाद भी सीएचसी वाली सुविधाएं शुरू नहीं की गई है। दरअसल, तब शासन से एक सीएचसी का बजट मिला था। वह शाहपुर और चरथावल की सीएचसी में कोल्ड चैन और मीटिंग कक्ष के लिए खर्च कर दिया गया। सीएचसी के मानक के अनुरूप यहां छह विशेषज्ञ चिकित्सकों की तैनाती होनी चाहिए। जिसमें फिजिशयन, सर्जन, बाल रोग विशेषज्ञ, स्त्री रोग विशेषज्ञ, और हड्डी रोग विशेषज्ञ चिकित्सक की तैनाती आवश्यक है। जबकि यहां सिर्फ दो जनरल फिजिशयन है। एक प्रसूति रोग विशेषज्ञ है। पीएचसी वाली पुरानी बिल्डिंग में बैठते हैं। सीएचसी के लिए निर्धारित कक्ष, चिकित्सकों के लिए आवास और जेनरेटर एवं ऑपरेशन की सुविधाओं का अभाव है। एक्सरे मशीन और पैथोलोजी की व्यवस्था नहीं है। यहां सिर्फ मलेरिया और टीबी की जांच होती है। स्टाफ के बने पुराने आवास जर्जर और रहने लायक नहीं है।

12 स्वास्थ्य उपकेंद्रों की हालत खस्ता
सीएचसी के अंतर्गत 29 गांवों में से 12 उप स्वास्थ्य उपकेंद्रों की हालत जर्जर है। लुहारी खुर्द, रोनी हरजीपुर, दधेडू खुर्द, न्यामू, कुल्हेड़ी, हैबतपुर, टांडा, बिरालसी के भवनों की दशा दयनीय है। कुटेसरा और मंगनपुर में उपकेंद्र तालाब के बीच और जर्जर है। कुल्हेड़ी, नगलां राई उपकेंद्रों पर कोई एएनएम तैनात नहीं है। जिससे गांवों में टीकाकरण आदि का कार्य प्रभावित होता है। सीएससी प्रभारी डॉ. अर्जुन सिंह ने बताया कि जर्जर भवनों के निर्माण के लिए शासन को प्रस्ताव भेजा है।
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एक फार्मेसिस्ट के भरोसे चरथावल की सीएचसी
चरथावल सीएचसी में सिर्फ एक फार्मेसिस्ट की तैनाती है। जिससे इमरजेंसी कार्य और दवाओं का वितरण अधिकांश वितरण कार्य वार्ड ब्वॉय से किया जाता है। जबकि दूधली, बलवाखेड़ी, बिरालसी, इदहचंद और बहेड़ी में पीएचसी पर भी एक-एक फार्मेसिस्ट है। सीएचसी पर महीने में 10 हजार मरीजों की ओपीडी होती है, जबकि पीएचसी पर महीने में ओपीडी में 1500 मरीजों की जांच होती है।
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