कुंभ के लिए होगी नदियों की निगरानी
मुजफ्फरनगर। प्रयागराज कुंभ शुरू होने वाला है। इस बीच नदियों की निर्मलता को बनाए रखने का प्रयास किया जा रहा है। गंगा, यमुना और सरस्वती में दूषित पानी न जाए। इसके लिए प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को कड़ी निगरानी के निर्देश दिए गए हैं। जनपद से होकर गुजर रही काली पूर्वी और काली पश्चिमी नदियां गंगा और यमुना में मिलती हैं। अब इसके किनारे लगे उद्योगों का साप्ताहिक निरीक्षण किया जा रहा है। साथ ही कहा गया है कि कोई भी उद्योग नदियों में दूषित जल न गिराए।
शुगर मिल, पेपर मिल के अलावा नगर निकायों से बड़े पैमाने पर निकलने वाला दूषित पानी नदियों में बहा दिया जाता है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश की ज्यादातर नदियां कहीं न कहीं गंगा और यमुना में जाकर मिलती हैं। यह पानी गंगा और यमुना में पहुंचता है और प्रदूषण बढ़ाता है। जनवरी माह में प्रयागराज में कुंभ शुरू होने वाला है। लाखों श्रद्धालु संगम में स्नान करते हैं। ऐसे में नदियों की शुद्धता को बनाए रखने के लिए विशेष निर्देश दिए गए हैं। जनपद से काली पूर्वी और काली पश्चिमी नदी निकलती है। इन दोनों नदियों में कुछ फैक्ट्रियों और शहर का गंदा पानी जाता है। इनमें एक शुगर मिल भी शामिल है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर नदियों के किनारे स्थित सभी उद्योगों को नोटिस जारी कर प्रदूषित पानी नहीं डालने के लिए चेताया है। इसके साथ ही उद्योगों का साप्ताहिक निरीक्षण किया जा रहा है। शासन स्तर पर नदियों के किनारे बसे प्रत्येक उद्योग और नगर क्षेत्र की रिपोर्ट मांगी जा रही है।
इन तिथियों पर महत्वपूर्ण स्नान
15 जनवरी मकर संक्रांति, 21 जनवरी पौष पूर्णिमा, चार फरवरी मौनी अमावस्या, 10 फरवरी बसंत पंचमी, 19 फरवरी माघी पूर्णिमा और चार मार्च को महाशिवरात्रि पर कुंभ में महत्वपूर्ण स्नान होगा। इसलिए अभी से नदियों की निगरानी बढ़ाई गई है।
जिन उद्योगों का पानी नदियों में जाता है, उनका साप्ताहिक निरीक्षण करने के आदेश मिले हैं। इस आदेशों के क्रम में प्रत्येक सप्ताह निरीक्षण कर रिपोर्ट पोर्टल पर अपलोड की जा रही है। - डीसी पांडेय, सहायक वैज्ञानिक, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड।