महापर्व पर श्रद्धालुओं ने भक्ति नृत्य किए
खतौली। बड़ा बाजार के पीसनोपाड़ा जैन मंदिर मेें एलाचार्य क्षमाभूषण व शिवभूषण महाराज के मंगल सानिध्य में श्रुतपंचमी के पावन पर्व पर विधान का आयोजन मंत्रोच्चार के साथ किया गया। इस अवसर पर भगवंतों का अभिषेक और पूजा अर्चना कर विधान की शुरुआत की गई। श्रद्धालुओं ने भक्ति में सराबोर होकर भक्ति नृत्य किए।
विधान आमंत्रण का मांगलिक कार्य भूषण आढ़ती ने किया। धर्म ध्वज पताका शशांक सराफ ने फहराई। सौ धर्म इंद्र बनने का सौभाग्य कल्पेंद्र जैन को प्राप्त हुआ। शशांक महलका चक्रवर्ती बने। यज्ञनायक मुकेश आढ़ती रहे। विधान मंडल उद्घाटन अमरचंद सराफ ने किया। धर्मसभा का संचालन करते हुए कल्पेंद्र जैन ने बताया कि यह पर्व जिनवाणी मां की वंदना का पर्व है। ज्येष्ठ शुक्ला पंचमी को षट खंडागम ग्रंथ को लिपिबद्ध करने का कार्य संपूर्ण हुआ था। इसी खुशी से षट खंडागम ग्रंथ की पूजा अर्चना की गई, जिसे हम श्रुत पंचमी और ज्ञान पर्व के नाम से भी जानते हैं। परमपूज्य आचार्य धरसेन के सुयोग्य शिष्य पुष्पदंत और भूतबलि ने ग्रंथ लेखन के महान कार्य का पूर्ण किया। इस पुण्यकारी विधान के अवसर पर श्रद्धालु पीत व केसरिया वस्त्रों में सुशोभित थे। विधान की पूजा संगीत की मधुर स्वर लहरियों के साथ की गई। श्रद्धालुओं ने भक्ति में सराबोर होकर भक्ति नृत्य किए। शास्त्र सभा व शंका समाधान का कार्यक्रम हुआ। मांगलिक क्रियाएं पंडित मधुबन शास्त्री के मार्ग दर्शन में वीतराग विज्ञान पाठशाला के बच्चों ने मनोहारी सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए। आयोजन में अनंतवीर, प्रमोद, जयचंद, हरिश्चंद्र , राजकुमार प्रवक्ता, अनुपम आढ़ती, दीपक, नीरज मंडी, सुनील टीकरी, राजेंद्र दादरी, योगेश सराफ, धर्नेंद्र सराफ, सुनील ठेकेदार, नीरज जैन प्रवक्ता, मृदुला, बबीता, अर्चना, अलका, हितेश, अंजलि, त्रिशला, पायल, प्रियंका आदि मौजूद रहे।