शिक्षकों की नियुक्ति नहीं होने से पढ़ाई बाधित
मुजफ्फरनगर। शिक्षा की दशा कैसे बदलेगी, पंडित दीनदयाल उपाध्याय राजकीय माडल इंटर कॉलेजों की अव्यवस्था से सवाल खड़े होते हैं। चार साल बाद भी सरकार जिले में बनाए गए माध्यमिक शिक्षा परिषद से जुडे़ पांच कॉलेज में शिक्षकों और स्टाफ की कोई नियुक्ति नहीं कर पाई है। केंद्र सरकार के 85 प्रतिशत अनुदान से 15.10 करोड़ की लागत से यह पांच राजकीय इंटर कॉलेज का निर्माण दिसंबर 2014 में पूरा कर लिया गया था। खानापूर्ति के लिए शासन के निर्देश जारी हुए और डीआईओएस ने अस्थायी तरीके से पांच अध्यापकों और चार लिपिकों की नियुक्ति कर दी।
माध्यमिक शिक्षा निदेशालय के तहत जिले के ग्रामीण क्षेत्र में कक्षा छह से 12 तक के विद्यार्थियों के लिए राजकीय माडल इंटर कॉलेज के निर्माण की योजना तत्कालीन अखिलेश सरकार में प्रारंभ हो गई थी। निर्माण बजट के लिए केंद्र सरकार ने 85 प्रतिशत और राज्य सरकार ने 15 प्रतिशत धनराशि खर्च की थी। लंबी प्रक्रिया के बाद ग्राम सभा से जमीन उपलब्ध कराई गई। एक कॉलेज के लिए 3.02 करोड़ रुपये आवंटित किए गए। बुढ़ाना ब्लाक के बिटावदा, पुरकाजी के खाईखेड़ी, चरथावल के बधाई कलां, मोरना के सिकंदरपुर और जानसठ ब्लाक के गांव कासमपुर खोला में राजकीय माडल इंटर कॉलेजों का निर्माण हो चुका है। 20 दिसंबर 2014 को तत्कालीन सीएम अखिलेश यादव ने इन माडल कॉलेजों का उद्घाटन कर दिया था, तब से आज तक राज्य सरकार इन कॉलेजों का संचालन नहीं कर पाई। तीन साल में माडल इंटर कॉलेजों में शिक्षकों और स्टाफ की नियुक्ति शासन की पत्रावलियों में उलझी है। बनाए गए माडल कॉलेजों का कोई रखरखाव और सुरक्षा नहीं है। सूबे में योगी सरकार के गठन के बाद सीएम योगी आदित्यनाथ ने माडल कॉलेजों को पंडित दीनदयाल उपाध्याय का नामकरण कर दिया था। सरकार की मंशा को देखते हुए उम्मीदें जगी थी कि जिले के यह पांच कॉलेज अब विद्यार्थियों का भविष्य बनाएंगे, मगर सरकार के एक साल बाद भी कॉलेज शासन की उपेक्षा से घिरे है। केवल कागजी खानापूर्ति के लिए निर्देश-आदेश हो रहे है। डीआईओएस मुनेश कुमार ने अस्थाई रूप से पांच शिक्षकों और चार क्लर्कों की नियुक्ति इन कॉलेजों में की है, मगर विटावदा और सिकंदरपुर कॉलेज में ही स्टाफ ने ज्वाइनिंग की है। अव्यवस्था के हालात में कक्षा छह के बजाए अब कक्षा नौ और 11 में छात्र-छात्राओं के प्रवेश की प्रक्रिया एक अपै्रल से प्रारंभ की गई है, लेकिन अभी तक विद्यार्थियों की पंजीयन में कोई रुचि नहीं है।
एक शिक्षक, एक क्लर्क के भरोसे कैसे चलेंगे कॉलेज
मुजफ्फरनगर। माध्यमिक शिक्षा निदेशालय के आदेश में वर्ष 2018-19 के शैक्षिक सत्र में पंडित दीनदयाल उपाध्याय राजकीय माडल इंटर कॉलेजों में शिक्षण कार्य प्रारंभ कर दिया गया है। डीआईओएस ने बिटावदा में राजकीय इंटर कॉलेज मुजफ्फरनगर के प्रवक्ता विकास कुमार, खाईखेडी में राजकीय जूनियर हाई स्कूल हरिनगर के प्रधानाध्यापक राजेंद्र सिंह, बधाईकलां में जूनियर हाईस्कूल रई से देवलता, सिकंदरपुर में जीआईसी रामअवतार, कासमपुर खोला में जीआईसी मुजफ्फरनगर के शिक्षक राजकुमार वर्मा को संबद्ध किया है। डीआईओएस दफ्तर के राजेश, चंद्रप्रकाश, एहसानअली को क्रमश: बिटावदा, कासमपुर खोला, सिकंदरपुर में वरिष्ठ सहायक बनाया गया है। राजकीय हाईस्कूल रई के अनिल को बधाईकला भेजा गया है। कैसे एक शिक्षक और एक लिपिक के भरोसे माडल कॉलेजों में पढ़ाई होगी, इसका अफसरों के पास कोई जवाब नहीं है।
माडल कॉलेजों में उग गया जंगल
मुजफ्फरनगर। बिटावदा के प्रधान प्रदीप उर्फ मंगलू ने बताया कि माडल कॉलेज में पढ़ाई नहीं स्वास्थ्य कैंप चल रहा है। चार वर्ष से बिल्डिंग बनी हुई है, मगर शिक्षकों की नियुक्ति नहीं होने से ग्रामीण बच्चे इंटर की शिक्षा से वंचित है। खाईखेड़ी के प्रधान के पति हरिओम त्यागी ने बताया कि भवन के चारों ओर जंगल उग चुका है। पढ़ाई कब शुरूहोगी, नहीं मालूम। कासमपुर खोला के मास्टर मदनपाल कहते है कि समझ में नहीं आता कि सरकार ने क्यों यह कॉलेज बनाए है। बच्चे पढ़ाई के लिए मीरापुर, ककरौली, मोरना, जानसठ तक जा रहे है। सरकार को ग्रामीण छात्र-छात्राओं के भविष्य की कोई चिंता नहीं है। जनप्रतिनिधि भी चुप्पी साधे है।