बाढ़ के बाद महामारी फैलने का खतरा
मोरना (मुजफ्फरनगर)। कई वर्षों से बाढ़ की त्रासदी झेल रहे गांव मज्जलिसपुर तौफीर में अब महामारी फैलने का खतरा मंडराने लगा है। ग्रामीण संक्रामक बुखार से पीड़ित होकर इलाज के अभाव में अपने घर में लाचारी का जीवन जी रहे हैं। गांव में कई ग्रामीणों की बुखार से मौत हो चुकी है।
गंगा खादर में बसे गांव मज्जलिसपुर तौफीर गांव मोरना से करीब 15 किलोमीटर दूरी पर स्थित है। इन गांवों की आबादी 10 हजार है। ये गांव मोरना, भोकरहेड़ी व लक्सर के उत्तराखंड के मार्ग पर बसे हैं। गांव मज्जलिसपुर तौफीर, नया गांव, सिताबपुरी, महाराज नगर में बाढ़ की विभीषिका झेल चुके ग्रामीण अब संक्रामक बीमारियों की महामारी का सामना कर रहे हैं। अचानक बुखार से पीड़ित कई ग्रामीणों की मौत भी चुकी है। मज्जलिसपुर तौफीर में रितेश पुत्र सुशील, सुदेश पत्नी जनेश्वर, रामकुमार पुत्र शांति पीलिया से पीड़ित हैं। गांव महाराज नगर के मेघा, रश्मि पुत्री महीपाल, देव, राजा पुत्र छोटू, शिवयांश पुत्र अनिल, विराट पुत्र दीपचंद, गोलू, शिवम, मोहित, नवीन आदि कई ग्रामीण बुखार की चपेट में है।
सरकारी अस्पताल खुद बीमार
करीब 12 वर्ष पूर्व निर्मित सरकारी अस्पताल खुद बीमार है। इस अस्पताल में स्वास्थ्य सुविधाओं का अभाव है। स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही से अस्पताल में कूड़े के ढ़ेर लगे हुए हैं। अस्पताल के भीतर फैली गंदगी से चारों तरफ का वातावरण काफी प्रदूषित है। ग्रामीणों के अनुसार न तो गांवों में कोई डॉक्टर आता है और न ही कोई टीकाकरण की टीम आती है। दूसरे गांवों से आने वाले प्राइवेट चिकित्सकों ने महामारी फैलने के डर से आना बंद कर दिया है। ग्रामीण महेंद्र चौहान, मदन सैनी, राजकुमार, जनेश्वर, रमेश पाल, अमित कुमार, सतीश, महावीर, संगीता, भारती, बिरमती, राजकुमारी, बबीता, शकुंतला, ममता बबली, मोहनी, बिमला आदि ने बताया कि गर्भवती महिलाओं को भी चिकित्सा सुविधा नहीं मिल पा रही है। ग्रामीणों ने हंगामा करते हुए पल्स पोलियो अभियान का बहिष्कार करने की चेतावनी दी है और सीएम से गुहार लगाई है।
मोरना के स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी डॉ. संजीव ने कहा कि यह मामला उनके संज्ञान में नहीं है। जांच के उपरांत कार्रवाई की जाएगी। गांव में चिकित्सकों की टीम भेजकर कैंप किया जाएगा।