मुकदमा वापसी पर सहमति, टोल पर पंचायत टली
मुजफ्फरनगर। रोहाना टोल प्लाजा पर 290 रुपये के मासिक पास के मुद्दे पर क्षेत्रीय नागरिकों के विरोध पर सांसद और विधायकों को हस्तक्षेप करना पड़ा। कलक्ट्रेट में डीएम की मौजूदगी में टोल टैक्स के विवाद पर हुई बैठक में निर्णय लिया गया कि स्थानीय वाहन स्वामियों से तय किए गए निर्धारित टोल टैक्स के संबंध में आई आपत्तियों से शासन को अवगत करा कर टोल में छूट के लिए पत्रावली भेजी जाएगी। बैठक में टोल प्रबंधन द्वारा ग्रामीणों पर किए गए मुकदमे को भी वापस लिए जाने पर सहमति बनी, जिस पर रविवार को रोहाना में प्रस्तावित पंचायत टाल दी गई।
कलक्ट्रेट के सभागार में डीएम राजीव शर्मा की उपस्थिति में रोहाना टोल प्लाजा के विवादित मुद्दे पर बैठक बुलाई गई। पूर्व केंद्रीय राज्यमंत्री एवं सांसद डॉ संजीव बालियान, पुरकाजी विधायक प्रमोद ऊंटवाल, देवबंद विधायक कुंवर ब्रिजेश सिंह सहित टोल प्रबंधन के अधिकारियों और स्थानीय ग्रामीणों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। टोल प्लाजा पर 20 किलोमीटर में पंजीकृत निजी वाहनों की आवाजाही के लिए 290 रुपये का मासिक पास निर्धारित किया गया है। नागरिक इस निर्णय का विरोध कर रहे है, क्योंकि मेरठ में टोल प्लाजा पर मासिक पास की कोई नियमावली नहीं है। तय सीमा के दायरे के पंजीकृत वाहन 20 रुपये टोल पर अदा करते हैं, जबकि आसपास के ग्रामीणों के वाहन बिना कर के निकाले जाते हैं। रोहाना क्षेत्र के ग्रामीण वाहनों को टोल कर से मुक्त करने को लेकर आंदोलनरत है। इस मुद्दे पर टोल पर हंगामा और प्रदर्शन हो चुका है। टोल फ्री कराने पर प्रबंधन की ओर से दो भाजपा नेताओं समेत 25 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया था, जिसके विरोध में रविवार को रोहाना में पंचायत की घोषणा की गई थी। बैठक में ग्रामीणों की बात सुनने के बाद सांसद डॉ संजीव बालियान ने कहा कि स्थानीय नागरिकों की बता को शासन के समक्ष रखा जाएगा। क्षेत्रीय एमएलए प्रमोद ऊंटवाल और देवबंद विधायक ब्रिजेश सिंह इस विषय में लखनऊ में वार्ता कर टोल टैक्स के लिए नई नीति की घोषणा कराएंगे। यह सवाल तर्क संगत है कि जिस वाहन स्वामी को सिर्फ माह में एक-दो बार टोल सड़क का प्रयोग करना है, वह 290 रुपये प्रति माह क्यो अदा करें। इस दौरान टोल के कुछ कर्मचारियों द्वारा अभद्र व्यवहार की शिकायत का मामला भी रखा गया। टोल प्रबंधन से एनपी सिंह, राजेश रंजन, जगदीश प्रसाद, हितेंद्र सिंह फोगाट ने शासनादेश के मुताबिक अपना पक्ष रखा। बैठक में टोल प्रबंधन की ओर से दर्ज कराए गए मुकदमे को वापस लेने पर सहमति बनी, जिस पर रविवार को होने वाली पंचायत को फिलहाल टाल दिया गया।