धंधेड़ा नाले पर ईटीपी प्लांट लगाएगा बोर्ड
मुजफ्फरनगर। प्रदूषण की मार झेल रही काली और हिंडन नदी में साफ पानी बहाने की योजना बनाई गई है। इसके लिए प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने शासन को प्रपोजल बनाकर भेजा है। जिसमें धंधेड़ा नाले पर दूषित जल उपचार संयंत्र (ईटीपी) लगाने का प्रपोजल भेजा गया है। प्लांट के जरिये बोर्ड पानी से विषैले तत्वों को बाहर खींच उसे साफ करेगा। जिसे बाद में काली वेस्ट और ईस्ट में छोड़ा जाएगा। यह साफ पानी फिर मेरठ परिक्षेत्र जाकर हिंडन नदी में मिलेगा।
कभी साफ पानी लेकर चलने वाली काली और हिंडन नदी औद्योगिक इकाईयों का शिकार हो गई है। सबसे अधिक काली नदी (वेस्ट) प्रदूषित है। काली वेस्ट के दायरे में करीब 30 किलोमीटर का क्षेत्र है, जबकि ईस्ट क्षेत्र में 20 किलोमीटर क्षेत्र आता है। इन नदियों के निकट बसे गांवों के भूजल में करीब 80 प्रतिशत आयरन घुल कर आ रहा है। भोपा रोड क्षेत्र की औद्योगिक इकाईयों का गंदा पानी भंडूरा-धंधेड़ा नाले से होकर काली नदी में गिरता है। धंधेड़ा नाले के पानी में बोर्ड की जांच में 7500 किलोग्राम प्रदूषण घरेलू के साथ अनेक उपकरणों का मिला है। यह रोजाना की स्थिति है। अब हिंडन को निर्मल करने की योजना चल रही है। इसके लिए क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने भी पहल शुरू कर दी है। काली नदी में जाने वाले प्रदूषित पानी को धंधेड़ा नाले पर ही रोका जाएगा। यहां पानी को दूषित जल उपचार संयंत्र (ईटीपी प्लांट) के जरिए साफ किया जाएगा। पानी से विषैले कण निकाल कर साफ कर आगे बहाया जाएगा। काली वेस्ट और ईस्ट के साफ होने के बाद हिंडन नदी भी साफ होगी। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सहायक वैज्ञानिक डॉ डीसी पांडे ने बताया कि ईटीपी प्लांट लगाने के लिए पहल शुरु हो गई है। प्रपोजल बनाकर शासन को भेजा गया है। प्रस्ताव मंजूर होते ही काम शुरू कराया जाएगा।
एसटीपी से घरेलू पानी होगा ट्रीटमेंट
मुजफ्फरनगर। काली नदी में शहर भर का मल-मूत्र भी गिरता है। इसमें भी बड़ी मात्रा में प्रदूषण मिला है। नगर पालिका ने 32 एमएलडी का सीवर ट्रीटमेंट प्लांट लगा है, जबकि यहां पानी की मात्रा कहीं अधिक है। ऐसे में इस प्लांट को 100 एमएलडी तक करने की जरूरत है। ताकि घरेलू नालियों से बहकर नदी में पहुंचने वाले पानी को भी बेहतर तरीके से ट्रीट कर आगे छोड़ा जा सके।
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करीब 100 गांव काली से प्रभावित
मुजफ्फरनगर। काली नदी (वेस्ट) के दूषित जल के कारण डबल, कितास, समौली, कैलाशनगर, इंचौड़ा, मंडावली खादर, वहलना, अंबरपुर, बेगराजपुर, सीमली, दीदाहेड़ी, लच्छेड़ा, नंगला, भनवाड़ा, पुरबालियान, जीवना, चलसीना, रतनपुरी आदि करीब 100 से अधिक गांवों का पानी पीने लायक नहीं है। भूजल प्रभावित होने से 500 स्तर पर टीडीएस युक्त तथा 80 फीसदी आयरन की मात्रा में नलों से जल निकल रहा है। कई गांव ऐसे हो गए है कि यहां पर खेतों में खड़ी फसलें भी बीमार हो चुकी है।