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संस्कृत भाषा से हमें राष्ट्र निर्माण व चरित्र निर्माण करना है-आनंद वेश

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संस्कृत भाषा से हमें राष्ट्र निर्माण करना है : आनंद वेश महाराज
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मोरना। गुरुकुल संस्कृत महाविद्यालय शुकतीर्थ में उत्तर प्रदेश संस्कृत संस्थान लखनऊ द्वारा समायोजित संस्कृत व्यवहार कार्यशाला के समापन के अवसर पर मुख्य अतिथि स्वामी आनंद वेश महाराज ने कहा कि संस्कृत देववाणी है, इसलिए प्रत्येक भारतीय का संस्कृत को आत्मसात करके अपने अंदर के विद्यमान देवत्व को जगाना है, सरल संस्कृत भाषा के द्वारा संभाषण करें। इस अमृत भाषा को अपने दैनिक व्यवहार में लाना चाहिए। संस्कृत भाषा के द्वारा हमें राष्ट्र निर्माण, चरित्र निर्माण करना है, जिससे हमारा भारत देश पुन: विश्व गुरु प्रतिष्ठापित होगा।
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शुकतीर्थ स्थित गुरुकुल आश्रम के प्रांगण में कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि महादेव आश्रम महाराज ने कहा कि संस्कृत भाषा को व्यवहार बनाकर हम विश्व की समस्त समस्याओं का समाधान कर सकते हैं। संस्कृत भाषा के प्रयोग करने पर उच्च चरित्र का निर्माण स्वयं ही हो जाता है। यदि हमें अपनी गौरवशाली भारतीय संस्कृति एवं अपनी ऋषि परंपराओं को जीवित रखना है, तो प्रत्येक नागरिक को इस सर्वक्षेष्ठ वैज्ञानिक भाषा का संरक्षण करते हुए अपने दैनिक व्यवहार में अवश्य लाना होगा। कार्यक्रम का संचालन प्रधानाचार्य प्रेमशंकर मिश्रा व अध्यक्षता सेवानिवृत्त प्रधानाचार्य इंद्रपाल राणा ने की। इस मौके पर विशाल भट्ट ने बताया कि विभिन्न संस्थानों के 61 प्रशिक्षकों के द्वारा संपूर्ण उत्तर प्रदेश राज्य में 23 सितंबर से 7 अक्तूबर तक के अनेक गुरुकुलों एवं संस्कृत महाविद्यालय तथा विद्यालयों में अध्ययनरत 2400 प्रशिक्षणार्थियों को प्रशिक्षण दिया गया। आश्रम में 60 विद्यार्थियों को संस्कृत भाषा की बारीकियों से गहनता से जानकारी देकर लाभ के बारे में बताया गया। इस दौरान विद्यार्थियों ने संस्कृत भाषा में राष्ट्र को समर्पित गीत का सुनाकर सबका मनमोह लिया। कार्यक्रम के आयोजन में विकास आचार्य, राणा आचार्य, सोमवीर सिंह आदि ने मुख्य भूमिका निभाई।
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